इटारसी……जंगल की खामोश वादियां अक्सर सुकून देती हैं, लेकिन जब प्रकृति और इंसान का आमना-सामना होता है, तो कई बार ऐसे खौफनाक मंजर सामने आते हैं जो किसी की भी रूह कंपा दें। मध्य प्रदेश के इटारसी के पास सुखतवा क्षेत्र के छींदापानी भीलटदेव जंगल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शाम ढलते ही अपने मवेशियों को घर वापस लाने जंगल गए एक 16 साल के मासूम किशोर पर एक भालू ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। भालू के खूंखार पंजों और पैने नाखूनों के वार से किशोर बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके शरीर पर गहरे घाव आए हैं और उसे बचाने के लिए डॉक्टरों को 20 टांके लगाने पड़े। इस खौफनाक हादसे में किशोर की हिम्मत और एक छोटे से मोबाइल फोन ने उसकी जिंदगी बचा ली।
शाम ढलते ही जंगल में मंडराया मौत का साया
घटना इटारसी के सुखतवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छींदापानी भीलटदेव जंगल की है। हर रोज की तरह शाम करीब 5:00 बजे 16 साल का विकलेश कासदे, पिता रमेश कासदे, जंगल में अपनी मवेशी (जंगली गाय) को लेने के लिए गया था। सूरज ढलने को था और जंगल में धीरे-धीरे अंधेरा छा रहा था। विकलेश अपने मवेशियों को ढूंढते हुए जंगल के अंदरूनी हिस्से में पहुंच गया। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि घात लगाए बैठा एक जंगली भालू उसकी जान का प्यासा बनकर झाड़ियों में छिपा बैठा है।
अचानक हुआ खूंखार हमला, पेट और पैर को नोचा
जैसे ही विकलेश झाड़ियों के करीब से गुजरा, अचानक एक विशालकाय भालू ने उस पर पूरी ताकत से झपट्टा मार दिया। भालू के इस अचानक और भयानक हमले से किशोर संभल भी नहीं पाया। भालू ने अपने नुकीले पंजों और दांतों से विकलेश के पेट और पैर पर ताबड़तोड़ वार किए। इस खूनी संघर्ष में विकलेश गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हालत में जमीन पर गिर पड़ा। जंगल के सन्नाटे में किशोर की चीखें गूंज उठीं, लेकिन आसपास कोई मदद मौजूद नहीं थी।
मोबाइल ने निभाई जीवन रक्षक की भूमिका
इस जानलेवा संकट की घड़ी में विकलेश ने घबराने या होश खोने के बजाय अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। भालू जैसे ही कुछ पलों के लिए उससे थोड़ा दूर हटा, खून से लथपथ विकलेश ने तुरंत अपनी जेब में हाथ डाला और मोबाइल फोन निकाला। उसने बिना एक पल गंवाए अपने परिजनों को फोन लगाया और कांपती आवाज में पूरी घटना की जानकारी दी। मोबाइल की घंटी और विकलेश की कॉल ने समय रहते उसके लिए वरदान साबित कर दी।
परिजनों और ग्रामीणों की मुस्तैदी से ब बची जान
फोन पर सूचना मिलते ही विकलेश के घर में कोहराम मच गया। मां सुनीता कासदे और परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए परिजन और आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ तुरंत जंगल की ओर दौड़े। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो विकलेश खून से लथपथ अचेत अवस्था के करीब था। ग्रामीणों को आता देख भालू वहां से जंगल में ओझल हो गया। परिजन तुरंत उसे लेकर नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया।
अस्पताल में डॉक्टरों की मशक्कत, शरीर पर आए 20 टांके
इटारसी के सरकारी अस्पताल में विकलेश की हालत गंभीर बनी हुई है। भालू के पंजों के गहरे निशान उसके पेट और पैर पर साफ देखे जा सकते हैं। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सर्जरी और टांके लगाने का काम शुरू किया। भालू के हमलों के गहरे घावों को भरने के लिए किशोर के शरीर पर कुल 20 टांके आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंच जाने और मोबाइल के जरिए सही वक्त पर सूचना मिलने से किशोर की जान खतरे से बाहर आ गई है। फिलहाल, अस्पताल में उसका इलाज जारी है और इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। वन विभाग को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है ताकि जंगल के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जा सके और ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके।
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