ब्यावरा: मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग में इन दिनों खलबली मची हुई है। मामला सरकारी सेवा की मर्यादा और निजी लाभ के बीच फंसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का है। ब्यावरा में दो पटवारियों पर आरोप है कि वे सरकारी नौकरी करते हुए एक निजी समाज कल्याण समिति में 'लाभ के पदों' पर काबिज हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद के केंद्र में 'निर्विन्ध्या महाविद्यालय एवं समाज कल्याण समिति' है, जो वर्ष 1997 से पंजीकृत है। आरोप है कि राजस्व विभाग में तैनात पटवारी संदीप सक्सेना और अतुल सक्सेना वर्षों से इस समिति में सक्रिय हैं। यह समिति न केवल महाविद्यालय चलाती है, बल्कि वेयरहाउस (गोदाम) जैसी व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन भी करती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी संदीप सक्सेना इस समिति में कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं, जबकि पटवारी अतुल सक्सेना समिति के सदस्य के रूप में भूमिका निभा रहे हैं। नियम के मुताबिक, इनका यह कार्यकाल 27 जुलाई 2027 तक जारी रहने की बात सामने आई है।
एसडीएम की दो-टूक: “यह नियम विरुद्ध है”
इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तो ब्यावरा के एसडीएम गोविंद दुबे ने स्पष्ट कर दिया कि कोई भी शासकीय कर्मचारी रहते हुए किसी भी प्रकार के निजी लाभ के पद पर कार्य नहीं कर सकता। एसडीएम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, “शासकीय सेवा में होते हुए किसी भी संस्थान या समिति से जुड़कर लाभ अर्जित नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा है, तो जांच अनिवार्य है।”
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल
पटवारी का पद राजस्व विभाग की रीढ़ होता है। भूमि, राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन जैसे संवेदनशील कार्यों में पटवारियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में यदि वे स्वयं ऐसी किसी समिति में पदाधिकारी हों जो व्यावसायिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ी है, तो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह मामला 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) का एक बड़ा उदाहरण है। आम जनता अब यह पूछ रही है कि:
क्या इन पटवारियों ने विभाग से निजी संस्था में काम करने की कोई पूर्व अनुमति ली थी?
यदि नहीं, तो इतने वर्षों तक विभागीय आला अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?
क्या वेयरहाउस और महाविद्यालय से होने वाली आय में इनकी कोई अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है?
अब जांच की बारी
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और राजस्व विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि यदि प्रारंभिक जांच में तथ्यों की पुष्टि होती है, तो विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
विदिशा भारती इस मामले की निष्पक्ष पड़ताल जारी रखेगी। क्या ब्यावरा प्रशासन इन 'पावरफुल' पटवारियों पर कार्रवाई का साहस दिखा पाएगा या यह मामला रफा-दफा हो जाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।
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