नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक 'बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक' किया है। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने जहां आम आदमी की जेब ढीली की है, वहीं अब सरकार ने सरकारी मशीनरी को 'किफायत मोड' पर डाल दिया है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक कड़ा फरमान जारी करते हुए सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों को खर्चों में भारी कटौती करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी खजाने पर बोझ कम करने की तैयारी
जारी किए गए नए आदेशों के मुताबिक, अब SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और LIC जैसी दिग्गज संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा। सरकार का मकसद साफ है—जितना हो सके विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जाए और अनावश्यक खर्चों को रोका जाए।
ये 3 बड़े बदलाव जो बदल देंगे सरकारी वर्किंग कल्चर:
1. विदेशी दौरों पर 'ब्रेक' और वर्चुअल मीटिंग का जोर
अब बैंक के चेयरमैन, एमडी या सीईओ को विदेश जाने से पहले सौ बार सोचना होगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों की विदेश यात्राएं कम से कम की जाएं। जब तक शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न हो, तब तक सभी मीटिंग्स, प्रोजेक्ट रिव्यूज और सेमिनार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए ही किए जाएंगे। यानी अब बैंकों में फिर से 'लॉकडाउन' जैसा नजारा दिखेगा, जहां सारा काम डिजिटल होगा।
2. पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की छुट्टी, EV का होगा राज
प्रदूषण कम करने और तेल आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने पर जोर दिया है। सभी सरकारी वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हेडक्वार्टर और ब्रांचों में तैनात पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को जल्द से जल्द हटाकर किराए पर इलेक्ट्रिक वाहन लें। इसके लिए बाकायदा टारगेट सेट करने को कहा गया है।
3. पीएम मोदी की 'राष्ट्रहित' वाली अपील का असर
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों और अधिकारियों से 'कोरोना काल' जैसे संयम की उम्मीद की थी। पीएम मोदी ने वैश्विक अस्थिरता और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट का हवाला देते हुए कहा था कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना राष्ट्रीय कर्तव्य है।
आम जनता और मिडिल क्लास के लिए ‘कड़वी खुराक’
सिर्फ अधिकारियों के लिए ही नहीं, प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों से भी कुछ त्याग करने का आग्रह किया है:
पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग: जिन शहरों में मेट्रो है, वहां निजी वाहनों को घर पर ही रखने की सलाह दी गई है।
सोना खरीदने से बचें: डॉलर को बचाने के लिए कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की गई है।
विदेश यात्रा टालें: मिडिल क्लास से आग्रह किया गया है कि वे छुट्टियों के लिए विदेशी डेस्टिनेशन के बजाय भारत में ही घूमें।
स्वदेशी अपनाएं: विदेशी सामान के बजाय 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष: सरकार का यह कदम संकेत है कि आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। सरकारी विभागों द्वारा खर्च में की गई यह कटौती देश की इकोनॉमी के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी।
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