शहडोल: सोशल मीडिया की दुनिया में 60 लाख (6 मिलियन) लोगों के दिलों पर राज करने वाले शहडोल के ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने मध्य प्रदेश पुलिस विभाग और उनके लाखों प्रशंसकों को चौंका दिया है। वर्दी में रील बनाने और यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले 'रील्स स्टार' कांस्टेबल ने अब अपनी पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।
सस्पेंशन बना इस्तीफे का कारण
पिछले कुछ दिनों से चर्चा में रहे विवेकानंद तिवारी ने विभागीय कार्रवाई से आहत होकर यह कदम उठाया है। हाल ही में, ट्रैफिक विभाग द्वारा उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विवेकानंद पिछले 15 दिनों से ड्यूटी से अनुपस्थित थे, जबकि इस दौरान वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर लगातार वीडियो और रील्स अपलोड कर रहे थे। विभागीय जांच में इसे पुलिस रेग्युलेशन 64 का उल्लंघन और अनुशासनहीनता माना गया। आरोप यह भी था कि उन्होंने वर्दी का उपयोग निजी प्रचार के लिए किया और कुछ वीडियो में वर्दी का लोगो हटाकर प्रस्तुति दी।
'बीमारी के दस्तावेज' और सिस्टम से लड़ाई
निलंबन के बाद विवेकानंद ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर डॉक्टर की पर्चियां, दवाइयां और मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए एक लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले तीन महीनों से गंभीर मानसिक तनाव, घबराहट और अनिद्रा से जूझ रहे हैं।
विवेकानंद का आरोप है कि 19 मई 2026 को उन्होंने यातायात थाना के व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी मेडिकल रिपोर्ट भेजकर तबीयत खराब होने की सूचना दी थी, जिसमें एसपी साहब भी शामिल थे। मनोचिकित्सक ने उन्हें आराम की सलाह दी थी, बावजूद इसके उनकी ड्यूटी उसी दिन जय स्तंभ चौक पर लगा दी गई और शाम को उन्हें 'गैरहाजिर' घोषित कर दिया गया। कांस्टेबल का कहना है कि इसी बात से आहत होकर उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
वर्दी गई, तो क्या? जागरूकता जारी रहेगी
नौकरी छोड़ने की बात पर विवेकानंद का रुख बेहद स्पष्ट है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “वर्दी को अलविदा कह दिया, तो क्या हुआ? मेरा मिशन जारी रहेगा। मैं लोगों को जागरूक करना और हेलमेट बांटना बंद नहीं करूँगा, बल्कि अब पहले से भी अधिक जोश के साथ समाज सेवा के इस काम को आगे बढ़ाऊंगा।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों का तांता लग गया है। जहाँ एक ओर लोग उन्हें नौकरी न छोड़ने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके जज्बे की तारीफ भी कर रहे हैं।
क्या पुलिस विभाग मानेगा इस्तीफा?
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर शहडोल के पुलिस अधीक्षक (SP) रामजी श्रीवास्तव ने अपना पक्ष रखा है। एसपी का कहना है कि उनके पास अभी तक कोई औपचारिक इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस्तीफा उनके पास आता है, तो उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
अब आगे क्या?
फिलहाल, पूरा मामला पुलिस प्रशासन और एक लोकप्रिय सोशल मीडिया स्टार के बीच का द्वंद्व बन गया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या विवेकानंद अपने इस्तीफे पर अडिग रहते हैं या विभाग उनकी समस्याओं को देखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालता है। एक बात तो तय है, इस विवाद ने सोशल मीडिया पर 'वर्दी बनाम निजी अभिव्यक्ति' की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।
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