सैलाना: मध्य मध्य प्रदेश के सैलाना में सोमवार का दिन एक बड़ी दुर्घटना और उसके बाद उपजे भारी विवाद के नाम रहा। नगर के मुख्य मार्ग पर एक विशाल नीम का पेड़ गिरने के बाद स्थिति उस समय बेकाबू हो गई, जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टर और एल्डरमैन के बीच जमकर नोकझोंक हुई। इस विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है, जहां एक ओर एल्डरमैन पर सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज हुआ है, वहीं भाजपा ने मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग उठा दी है।
आखिर अस्पताल में क्या हुआ?
घटना की शुरुआत नगर के मुख्य मार्ग पर एक विशाल नीम के पेड़ के गिरने से हुई, जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया। घायल को तुरंत इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। आरोप है कि वहाँ पहुँचते ही इलाज में देरी को लेकर नगर परिषद के एल्डरमैन नाथूलाल राठौड़ और ड्यूटी पर तैनात डॉ. नीरज सिंह चौहान के बीच तीखी बहस हो गई।
एल्डरमैन का पक्ष: "जान बचाने की कोशिश थी, पर मिला अपमान"
एल्डरमैन नाथूलाल राठौड़ ने अपनी सफाई में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घायल की हालत नाजुक थी और उसे अस्पताल में समय पर उचित इलाज नहीं मिल पा रहा था। राठौड़ के अनुसार, जब उन्होंने डॉक्टर से जल्द उपचार की गुहार लगाई, तो उनकी सुनवाई के बजाय उन्हें अपमानित किया गया। मजबूरन उन्हें घायल को निजी वाहन में डालकर रतलाम रेफर करना पड़ा। राठौड़ का दावा है कि उनका एकमात्र उद्देश्य एक नागरिक की जान बचाना था, लेकिन डॉक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बाद में झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी।
डॉक्टर का दावा: "गाली-गलौज और मारपीट की धमकी"
दूसरी ओर, ड्यूटी पर तैनात डॉ. नीरज सिंह चौहान ने पुलिस को दी गई शिकायत में पूरी घटना का दूसरा पहलू रखा है। डॉक्टर के आवेदन के अनुसार, 1 जून को दोपहर करीब 12 बजे वे मरीज का उपचार कर रहे थे, तभी एल्डरमैन नाथूलाल राठौड़ अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। डॉक्टर का आरोप है कि एल्डरमैन और उनके साथियों ने शासकीय कार्य में न केवल बाधा पहुंचाई, बल्कि उन्हें गाली-गलौज की, हाथापाई की और जान से मारने की धमकी भी दी। इस हंगामे के कारण अन्य मरीजों का उपचार भी काफी देर तक बाधित रहा।
राजनीतिक तूल पकड़ा मामला
इस घटना के बाद मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। डॉक्टर के आवेदन पर एल्डरमैन के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया है। भाजपा ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, स्थानीय प्रशासन मामले को शांत कराने और अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के प्रयास में जुटा है।
फिलहाल, इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के बीच के संबंधों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच में सच कौन सा पक्ष सामने आता है।
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