इंदौर। लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड की गूंज अब मध्य प्रदेश के इंदौर तक सुनाई दे रही है। शहर में छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने 'ऑपरेशन अलर्ट' मोड ऑन कर दिया है। मंगलवार को इंदौर में नगर निगम, प्रशासन और फायर विभाग की संयुक्त टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके बाद शिक्षा जगत और कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया। शहर के 10 बड़े कोचिंग संस्थानों और नामी व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया गया है।
सुरक्षा के नाम पर ‘मौत का जाल’
छापेमारी के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे बेहद डराने वाली हैं। जांच टीम को कई संस्थानों में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ 'खानापूर्ति' मिली। गीता भवन स्थित प्रतिष्ठित कैटालाइजर कोचिंग सेंटर में तो हद ही हो गई। वहां न केवल सुरक्षा व्यवस्था लचर थी, बल्कि सबसे खतरनाक बात यह थी कि बिल्डिंग का इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) ही बंद पाया गया।
कल्पना कीजिए, यदि वहां कोई अनहोनी हो जाती, तो सैकड़ों छात्र कहाँ जाते? इसी तरह की गंभीर खामियों के चलते न्यूक्लियम, रामानुजन, आयाम, इकरथ और मक्खन वाला होटल जैसी नामी जगहों को भी प्रशासन ने सील कर दिया है।
सिर्फ कोचिंग ही नहीं, बड़ी इमारतें भी निशाने पर
प्रशासन की यह कार्रवाई केवल कोचिंग सेंटर्स तक सीमित नहीं रही। टीम ने भंवरकुआं समेत शहर के प्रमुख व्यावसायिक परिसरों की भी कुंडली खंगाली। इस दौरान वेदा बिजनेस पार्क, अपोलो एवेन्यू और अपोलो आर्केड जैसी बड़ी इमारतों की फायर सेफ्टी की पोल खुल गई।
जांच में क्या पाया गया?
डेड फायर सिस्टम: कई इमारतों में लगे फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम शोपीस बनकर रह गए थे।
मेंटेनेंस का अभाव: आग बुझाने के उपकरण तो थे, लेकिन उनकी सर्विसिंग का रिकॉर्ड सालों से गायब था।
नियमों की अनदेखी: फायर एनओसी के नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया।
प्रशासन की दो टूक: “छात्रों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा है कि यह कार्रवाई अभी केवल शुरुआत है। जिन व्यावसायिक परिसरों में फायर सेफ्टी सिस्टम मानक के अनुरूप नहीं हैं या जिनका मेंटेनेंस नहीं हो रहा है, उन्हें सीधे नोटिस थमाए गए हैं। समय सीमा के भीतर खामियां दूर नहीं करने पर इन इमारतों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ा सवाल
शहर के हजारों छात्र अपनी मेहनत और भविष्य को संवारने के लिए इन कोचिंग सेंटर्स में जाते हैं। क्या सुरक्षा के नाम पर ली जाने वाली मोटी फीस के बदले में उन्हें सिर्फ असुरक्षित कमरे मिल रहे हैं? फिलहाल, इस कार्रवाई ने कोचिंग माफियाओं के माथे पर पसीना ला दिया है।
प्रशासन का यह कदम उन सभी संस्थानों के लिए एक चेतावनी है, जो कमाई की अंधी दौड़ में छात्रों की सुरक्षा को ताक पर रख रहे हैं। शहरवासी इस कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि यह अभियान तब तक जारी रहना चाहिए जब तक हर इमारत पूरी तरह सुरक्षित न हो जाए।
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