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इंदौर में एक्शन मोड में नगर निगम: फायर सेफ्टी से खिलवाड़

14-06-2026  Editor Shubham Jain  16 views
इंदौर में एक्शन मोड में नगर निगम: फायर सेफ्टी से खिलवाड़

इंदौर: अगर आप शहर के किसी होटल, अस्पताल या व्यावसायिक परिसर में जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! क्या आप जानते हैं कि जिस इमारत में आप कदम रख रहे हैं, वहां आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं भी या नहीं? इंदौर नगर निगम ने इसी सुरक्षा सवाल पर एक कड़ा रुख अपनाते हुए शहर के 8 प्रमुख व्यावसायिक संस्थानों पर ताले जड़ दिए हैं।

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के सख्त निर्देशों के बाद पूरे शहर में फायर सेफ्टी ऑडिट का विशेष अभियान छेड़ा गया है। इसी कड़ी में, नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले और लोगों की जान को जोखिम में डालने वाले संस्थानों के खिलाफ निगम का डंडा चला है।

इन संस्थानों पर हुई बड़ी कार्रवाई

निगम की टीम ने अचानक छापा मारकर जिन संस्थानों को सील किया है, उनमें नामी होटल और अस्पताल भी शामिल हैं। कार्रवाई की चपेट में आए संस्थानों की सूची इस प्रकार है:

होटल यासिका

शिवानी होटल

होटल नवलेरी

होटल ट्रीबो

होटल सफायर

नर्मदा डायग्नॉस्टिक

रिवाज फैशन

महावीर हॉस्पिटल

इन सभी संस्थानों में फायर सेफ्टी के मानकों (Fire Safety Norms) में भारी खामियां पाई गईं। कहीं फायर एग्जिट का रास्ता बंद था, तो कहीं फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम या तो खराब थे या नदारद।

'जान है तो जहान है': निगम का कड़ा संदेश

नगर निगम प्रशासन ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम के अनुसार, व्यावसायिक इमारतों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनका सही रखरखाव अनिवार्य है।

आयुक्त क्षितिज सिंघल ने स्पष्ट किया, “यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है। हम पूरे शहर के हर उस संस्थान की जांच करेंगे जो जनता के लिए खुला है। अगर फायर एनओसी (NOC) नहीं है या सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती गई, तो सीलिंग की कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगी।”

ग्राहकों के लिए जरूरी चेतावनी

शहर के जागरूक नागरिकों और आगंतुकों के लिए यह एक संकेत है कि वे किसी भी इमारत में प्रवेश करने से पहले वहां के सुरक्षा इंतजामों के प्रति सजग रहें। आग जैसी घटनाएं पूर्व सूचना देकर नहीं आतीं, इसलिए सुरक्षा मानकों का पालन करना केवल कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है।

क्या है फायर सेफ्टी के मानक?

प्रत्येक मंजिल पर फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) का होना।

इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) का रास्ता हमेशा खाली और खुला होना।

फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम का नियमित ऑडिट।

समय-समय पर कर्मचारियों को फायर ड्रिल का प्रशिक्षण देना।

इंदौर नगर निगम की इस कार्रवाई ने शहर के उन तमाम संस्थानों में हलचल मचा दी है, जो सुरक्षा को दरकिनार कर अपना कारोबार चला रहे थे। आने वाले दिनों में यह अभियान और भी तेज होगा। क्या आपका पसंदीदा होटल या अस्पताल सुरक्षित है? शायद अब इन संस्थानों को अपनी व्यवस्था सुधारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


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