LaraMag - Sistem Berita / Majalah Laravel Multibahasa

Header
collapse
Home / बिजनेस / हजारीबाग में पत्रकार पर हमला: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार, डॉ. अरुण सक्सेना की दहाड़

हजारीबाग में पत्रकार पर हमला: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार, डॉ. अरुण सक्सेना की दहाड़

28-04-2026  Shubham Jain  47 kali dilihat

ImgResizer_IMG-20260428-WA0075
भोपाल/रांची: झारखंड के हजारीबाग से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सत्ता के नशे में चूर समर्थकों की गुंडागर्दी को भी उजागर किया है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के अस्पताल निरीक्षण के दौरान एक पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। इस घटना पर मध्य प्रदेश से तीखी प्रतिक्रिया आई है। भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ की मध्य प्रदेश इकाई, जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ़ मध्यप्रदेश (JUMP) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण सक्सेना ने इस हमले को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए खुली चेतावनी दी है।

सवाल पूछने की मिली सजा: क्या यही है लोकतंत्र?

घटना उस वक्त की है जब झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग के एक अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वहां मौजूद एक पत्रकार ने जनहित से जुड़ा एक सीधा सवाल पूछा। पत्रकार का काम सवाल पूछना है और मंत्री का काम जवाब देना, लेकिन यहाँ जवाब की जगह लात-घूंसे और गालियां मिलीं। मंत्री समर्थकों ने अपना आपा खो दिया और कर्तव्य निभा रहे पत्रकार पर टूट पड़े।

सबसे शर्मनाक बात यह रही कि यह सब मंत्री और जिला प्रशासन की मौजूदगी में हुआ। तमाशबीन बने अधिकारियों और मौन साधे मंत्री ने यह संदेश दे दिया कि सत्ता के गलियारों में अब 'सवालों' के लिए कोई जगह नहीं बची है।

डॉ. अरुण सक्सेना का फूटा गुस्सा: “अब JUMP मैदान में है”

इस कायराना हरकत की खबर फैलते ही देशभर के पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया। मध्य प्रदेश में पत्रकारों की बुलंद आवाज डॉ. अरुण सक्सेना ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने हजारीबाग की घटना को सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताया।

डॉ. सक्सेना ने गरजते हुए कहा:

“पत्रकारों पर हाथ उठाने वालों, सावधान हो जाओ... अब JUMP मैदान में आ चुका है। जब सवाल पूछने पर लाठियां चलने लगें, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र खतरे में है। हम अपने साथी पत्रकार के साथ हुए इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

सत्ता का मौन: सहमति या संरक्षण?

डॉ. अरुण सक्सेना ने शासन और प्रशासन की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यह मौन इस हमले को दी गई 'मौन सहमति' है? क्या सत्ता का संरक्षण प्राप्त गुंडे अब तय करेंगे कि पत्रकार क्या पूछेंगे और क्या नहीं? प्रशासन का इस मामले में अब तक ढुलमुल रवैया अपनाना कई संदेह पैदा करता है।

JUMP की कड़ी मांग: दोषियों को सलाखों के पीछे भेजो

जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ़ मध्यप्रदेश (JUMP) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस लड़ाई को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता। संघ ने मांग की है कि:

पत्रकार पर हमला करने वाले आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।

घटना की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित की जाए।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए 'पत्रकार सुरक्षा कानून' को कड़ाई से लागू किया जाए।

सच की आवाज दबेगी नहीं

हजारीबाग की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि उस हर व्यक्ति की आवाज को दबाने की कोशिश है जो सच बोलना चाहता है। लेकिन डॉ. अरुण सक्सेना और JUMP जैसे संगठनों के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि कलम की ताकत को लाठियों के दम पर नहीं कुचला जा सकता। अब देखना यह है कि झारखंड सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है या फिर लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ को यूँ ही लहूलुहान होने के लिए छोड़ दिया जाएगा।


Bagikan:

Tinggalkan komentar

Alamat email Anda tidak akan dipublikasikan. Kolom yang wajib diisi ditandai *

Pengalaman Anda di situs ini akan ditingkatkan dengan mengizinkan cookie Kebijakan Cookie