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हत्याकांड का 24 घंटे में पर्दाफाश: भाजपा कार्यकर्ता सचिन राजपूत के कत्ल के पीछे निकला 'मुंहबोला जीजा'

18-06-2026  Editor Shubham Jain  49 views
हत्याकांड का 24 घंटे में पर्दाफाश: भाजपा कार्यकर्ता सचिन राजपूत के कत्ल के पीछे निकला 'मुंहबोला जीजा'

​नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई थी, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और चर्चित 'राजपूत ढाबा' के संचालक सचिन राजपूत की निर्मम हत्या कर दी गई थी। लेकिन, नर्मदापुरम पुलिस ने अपनी सक्रियता का परिचय देते हुए महज 24 घंटे के भीतर इस ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली है। हत्या का खुलासा होते ही हर कोई दंग रह गया, क्योंकि कातिल कोई बाहरी नहीं, बल्कि सचिन का अपना 'मुंहबोला जीजा' निकला।


​क्या था पूरा मामला?
​सोहागपुर के पिपरिया रोड स्थित महुआ गांव के पास अपना ढाबा संचालित करने वाले सचिन राजपूत 17 जून की रात जब अपने घर नहीं लौटे, तो परिजनों में हड़कंप मच गया। देर रात तक तलाश करने के बाद जब सचिन का पता नहीं चला, तो परिवार ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सचिन की मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया और घटनास्थल पर पहुंची। वहां का मंजर खौफनाक था—सचिन का खून से लथपथ शव पड़ा मिला था।


​'चरित्र' पर शक बना मौत का कारण
​पुलिस की सघन जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने इस हत्याकांड की परतों को बहुत तेजी से खोला। पूछताछ के दौरान आरोपी विवेक गुर्जर (30 वर्ष) ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे सचिन के चरित्र पर गहरा संदेह था। इसी निजी रंजिश और शंका के चलते उसने हत्या की खौफनाक साजिश रची और मौका पाकर सचिन को मौत के घाट उतार दिया।


​पुलिस की तेज कार्रवाई और बरामदगी
​वारदात की गंभीरता को देखते हुए नर्मदापुरम पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया था। पुलिस ने न केवल आरोपी विवेक गुर्जर को दबोचा, बल्कि उसके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल की गई बाइक और एक अवैध पिस्टल भी बरामद की है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की इलाके में जमकर सराहना हो रही है। फिलहाल, पुलिस आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है ताकि इस मामले से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू को स्पष्ट किया जा सके।
​कानून का खौफ बरकरार


​इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। जहां अपराधी ने शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देने की कोशिश की, वहीं पुलिस की आधुनिक जांच तकनीकों ने उसे ज्यादा देर तक छिपने नहीं दिया। 'विदिशा भारती' अपने पाठकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार की आपसी रंजिश या संदेह को बातचीत से सुलझाएं, कानून हाथ में लेना किसी का भी अंत बुरा ही करता है।


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