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फर्जी अतिथि शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाना लूटने वाले दो प्राचार्य सस्पेंड

19-06-2026  Vijay Sharma  16 views
फर्जी अतिथि शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाना लूटने वाले दो प्राचार्य सस्पेंड

सागर/छतरपुर: शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार की एक ऐसी काली करतूत सामने आई है जिसने पूरे छतरपुर जिले के शिक्षा विभाग को शर्मसार कर दिया है। छतरपुर के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चंद्रनगर में फर्जी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर लाखों रुपये का सरकारी मानदेय डकारने के मामले में सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी ने सख्त रुख अपनाते हुए दो प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामले की जड़ शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चंद्रनगर से जुड़ी है। शिकायत के बाद जब इसकी जांच की गई, तो परत-दर-परत भ्रष्टाचार की ऐसी फाइलें खुलीं कि अधिकारी भी दंग रह गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय में हर्षित सेन और दुर्गेश कुमार पाठक की अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध और फर्जी तरीके से की गई थी।

बिना पैनल, बिना पढ़ाई और हो गया भुगतान!

जांच रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों अभ्यर्थी विद्यालय के स्वीकृत पैनल में शामिल ही नहीं थे। इसके बावजूद तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य प्रकाशचंद्र खरे ने न केवल इनका चयन किया, बल्कि इन्हें स्कूल में पढ़ाने की अनुमति भी दे दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ये फर्जी शिक्षक न तो कभी स्कूल आए और न ही इन्होंने कभी अध्यापन का कार्य किया। इसके बावजूद, इनकी उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज की गई और शासन की संचित निधि से इनका मानदेय भी आहरित कर लिया गया।

लापरवाही की पराकाष्ठा: प्राचार्य रेंजा की भूमिका

इस पूरे खेल में तत्कालीन संकुल प्राचार्य राजकुमार रेंजा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। नियम यह है कि मानदेय भुगतान से पहले उपस्थिति का भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य है, लेकिन रेंजा ने बिना किसी परीक्षण के इन फर्जी शिक्षकों की उपस्थिति को स्वीकार कर लिया। जांच में इसे घोर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितता माना गया।

निलंबन की कार्रवाई

कलेक्टर छतरपुर से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर, कमिश्नर अनिल सुचारी ने इसे 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965' का सीधा उल्लंघन माना। इसके बाद, 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966' के नियम-9 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए:

प्रकाशचंद्र खरे (तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

राजकुमार रेंजा (तत्कालीन संकुल प्राचार्य) को भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के लिए सस्पेंड किया गया है।

विभाग में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। माना जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में और भी कई बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि क्या इस तरह की धांधली अन्य स्कूलों में भी चल रही है। विदिशा भारती के पाठकों को यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार का यह दीमक किस तरह सरकारी खजाने और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।


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