विदिशा भारती पठारी
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का ढर्रा सुधारने और बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। पठारी तहसील अंतर्गत ग्राम जाजपोन की प्राथमिक शाला और आदिम जाति कल्याण छात्रावास पठारी में एसडीएम मोतीलाल अहिरवार, एसडीओपी रोशनी सिंह ठाकुर और तहसीलदार प्रेमलता पाल के इस औचक निरीक्षण ने स्कूल स्टाफ को चौंका दिया। अधिकारियों ने औपचारिकता से परे सीधे नन्हे-मुन्ने बच्चों से संवाद स्थापित किया, खुद शिक्षक की भूमिका में आकर सवाल पूछे और स्कूल के चूल्हे-चौके तक का मुआयना किया।
बैकबेंचर्स के बीच पहुंचे अफसर, बच्चों से पूछे पहाड़े और गिनती
निरीक्षण के दौरान एसडीएम मोतीलाल अहिरवार सीधे कक्षाओं में दाखिल हुए। उन्होंने किसी भारी-भरकम प्रशासनिक अंदाज की बजाय एक दोस्ताना माहौल बनाया ताकि बच्चे झिझक छोड़कर खुलकर बात कर सकें।
~ एसडीएम और तहसीलदार शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर भी पहुंचे जहां पर रखरखाव और स्टॉक का बारीकी से निरीक्षण किया गया।

~ एसडीएम ने नन्हे छात्रों से गिनती सुनी, गणित के छोटे-छोटे सवाल पूछे और हिंदी-अंग्रेजी की किताबों से पाठ पढ़वाकर उनकी बुनियादी शैक्षिक स्थिति को परखा। जब एक बच्चे ने बेबाकी से गिनती सुनाई, तो अधिकारियों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। वहीं, कुछ बच्चों को पढ़ाई में झिझकते देख एसडीएम ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान दें और रटने की जगह समझ आधारित शिक्षा को बढ़ावा दें।
~ एसडीओपी रोशनी सिंह ठाकुर ने भी बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि क्या शिक्षक रोजाना समय पर आते हैं? क्या उन्हें खेलकूद का मौका मिलता है? बच्चों ने भी निडर होकर अपने स्कूली जीवन के अनुभव अधिकारियों से साझा किए।
~ मिड-डे मील के बर्तन खंगाले, रसोइयों को स्वच्छता का सख्त पाठ
कक्षाओं के निरीक्षण के बाद पूरा प्रशासनिक अमला सीधे स्कूल की रसोई और भोजन शेड की तरफ मुड़ा। मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता को लेकर अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायतें मिलती हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने बारीकी से जांच की :
~ मेनू चार्ट का मिलान: दीवार पर टंगे मेनू चार्ट के अनुसार आज क्या बनना तय था और वास्तव में बर्तनों में क्या पक रहा था, इसका मिलान किया गया।
~ अनाज और तेल की गुणवत्ता: राशन भंडारण कक्ष में जाकर दाल, चावल, मसाले और तेल के पैकेट देखे गए।
~ स्वच्छता और शुद्धता: रसोइयों से साफ-सफाई के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। बर्तनों की धुलाई, खाना ढकने की व्यवस्था और रसोइयों के हाथ धोने के नियमों की जांच हुई।
~ एसडीएम अहिरवार ने रसोइयों को स्पष्ट चेतावनी दी कि बच्चों की थाली में परोसे जाने वाले भोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भोजन समय पर मिले, पोषक तत्वों से भरपूर हो और परिसर में मक्खी-मच्छर या गंदगी बिल्कुल न पनपे।
~ आदिम जाति कल्याण छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं का ग्राउंड रियलिटी चेक के दौरान ग्रामीण और दूरदराज के आदिवासी अंचलों से आकर रहने वाले छात्रों के रहन-सहन का स्तर कैसा है, इसे अधिकारियों ने खुद अपनी आंखों से देखा।
~ तहसीलदार प्रेमलता पाल ने छात्रावास के कमरों, बिस्तरों और अलमारियों की स्थिति देखी।
~ शुद्ध पेयजल की उपलब्धता: पानी की टंकियां कब साफ की गईं और वाटर फिल्टर चालू हालत में हैं या नहीं।
~ शौचालय और स्नानागार: शौचालयों में पानी का नियमित फ्लो और पर्याप्त सफाई का प्रबंध है या नहीं।
~ बिजली और रोशनी: कमरों में पंखे, लाइट और सुरक्षित वायरिंग की स्थिति जांची गई ताकि किसी भी हादसे की आशंका न रहे।
"लापरवाही मिली तो नपेंगे जिम्मेदार" – निरीक्षण के समापन पर एसडीएम मोतीलाल अहिरवार ने उपस्थित शिक्षकों, छात्रावास अधीक्षकों और कर्मचारियों की संयुक्त बैठक ली। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:
सरकारी स्कूलों और छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चे समाज के सबसे संवेदनशील तबके से आते हैं। इन्हें केवल किताबों का ज्ञान देना ही काफी नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित, स्वच्छ और प्रेरणादायक वातावरण देना हमारी पहली जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर बच्चों के अधिकारों, शिक्षा या भोजन में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित जिम्मेदार कर्मियों पर सीधी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"
~ एसडीओपी रोशनी सिंह ठाकुर ने स्कूल परिसर की सुरक्षा, बाउंड्री वॉल और आसपास के माहौल को सुरक्षित रखने पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण परिवेश की छात्राएं बिना किसी भय के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।
★ इस औचक निरीक्षण से क्षेत्र के अन्य सरकारी विभागों, स्कूलों और छात्रावासों में भी हड़कंप मच गया है। जाजपोन के ग्रामीणों का कहना है कि जब इस तरह से वरिष्ठ अधिकारी जमीनी स्तर पर उतरकर बच्चों की सुध लेते हैं, तो सरकारी तंत्र में सुधार की उम्मीद और मजबूत होती है।
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