आकाश धाकड़ विदिशा: साइबर अपराधियों के नए हथकंडों से सावधान! अगर आप भी चंद रुपयों के लालच में अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को किराए पर दे रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। यह छोटी सी गलती आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है। विदिशा जिले के सिरोंज थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां बैंक खाते किराए पर देकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
क्या था पूरा मामला?
मामला इस साल फरवरी का है, जब साइबर ठगों द्वारा लोगों के साथ की गई धोखाधड़ी की राशि का लेन-देन करने के लिए स्थानीय बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 फरवरी 2026 को सिरोंज थाने में आरोपी मोनू पिता लालाराम कुशवाह और सुनील कुशवाह के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध से संबंधित धाराओं (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला पंजीबद्ध किया था।
'फरार' चल रहा था मास्टरमाइंड
जांच के दौरान पुलिस ने मोनू कुशवाह को तो पहले ही दबोच लिया था, लेकिन इस गिरोह का दूसरा अहम सदस्य सुनील कुशवाह घटना के बाद से ही पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। पुलिस की टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली सटीक सूचना के आधार पर, सिरोंज पुलिस ने 16 जून को फरार आरोपी सुनील (40 वर्ष), निवासी ग्राम झुकर जोगी, थाना लटेरी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया गया है।
पुलिस की 'साइबर' सर्जिकल स्ट्राइक
यह पूरी कार्रवाई विदिशा पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के सख्त निर्देशों पर की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सोनू डावर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सिरोंज निरीक्षक गजेंद्र सिंह बुंदेला के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम की तत्परता का ही नतीजा है कि साइबर ठगों का यह नेटवर्क अब पूरी तरह से टूट चुका है।
टीम का सराहनीय प्रयास
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह बुंदेला के साथ सउनि हरीश ठाकुर, आरक्षक शशांक पाठक, विष्णु तोमर और आरक्षक गुर्जेंद्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इन पुलिसकर्मियों ने दिन-रात एक कर तकनीकी और मैदानी स्तर पर काम किया, जिससे फरार आरोपी का सुराग मिल सका।
जनता के लिए चेतावनी
'विदिशा भारती' अपने पाठकों को आगाह करती है कि कभी भी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या केवाईसी दस्तावेज किसी भी अजनबी को साझा न करें। साइबर अपराधी इन खातों का उपयोग लोगों को लूटने के लिए करते हैं और अंत में फंसने वाला व्यक्ति खुद बैंक खाताधारक होता है। कानून की नजर में आपका खाता इस्तेमाल होना सीधे तौर पर अपराध माना जाता है।
विदिशा पुलिस का यह एक्शन स्पष्ट संदेश है कि साइबर क्राइम करने वाला कोई भी शातिर बच नहीं पाएगा। शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई वाकई काबिले-तारीफ है।
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