भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग महिला, रिटायर्ड आर्मीमैन और एक युवक को निशाना बनाकर उनके बैंक खातों से कुल करीब 3 लाख 4 हजार 300 रुपये निकाल लिए। ठगी के इन मामलों में कहीं WhatsApp पर भेजी गई APK फाइल, कहीं क्रेडिट कार्ड की NOC दिलाने के नाम पर भेजा गया लिंक और कहीं फेसबुक विज्ञापन के जरिए थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करना वजह बना।
तीनों मामलों में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े विवरणों की जांच कर रही है।
WhatsApp पर APK फाइल खोलना पड़ा महंगा, महिला के 1.60 लाख रुपये गायब
साइबर ठगी का पहला मामला हबीबगंज क्षेत्र से सामने आया है। यहां 66 वर्षीय महिला के WhatsApp पर आई APK फाइल कथित तौर पर ठगी का कारण बनी। जानकारी के अनुसार, अरेरा कॉलोनी निवासी अनुराधा कुकरेजा के साथ 13 अक्टूबर को यह घटना हुई।
बताया गया है कि महिला के WhatsApp पर एक APK फाइल भेजी गई थी। फाइल खोलने के बाद उनके बैंक खाते से 1 लाख 60 हजार रुपये निकल गए। घटना का पता चलने पर मामले की शिकायत की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर किसके हैं।
APK एक प्रकार की इंस्टॉलेशन फाइल होती है, जिसका इस्तेमाल Android फोन में ऐप इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। अनजान स्रोत से आई ऐसी फाइल खोलने या इंस्टॉल करने पर फोन की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप संवेदनशील जानकारी हासिल करने या डिवाइस का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड की NOC के नाम पर रिटायर्ड आर्मीमैन से ठगी
दूसरा मामला कोलार क्षेत्र का है। यहां रिटायर्ड आर्मीमैन मनोज कुमार यादव को क्रेडिट कार्ड की NOC यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिलाने के नाम पर निशाना बनाया गया।
शिकायत के मुताबिक, ठग ने WhatsApp पर एक लिंक भेजा और उससे जुड़ी जानकारी भरने के लिए कहा। इसके बाद उनके खाते से 94,300 रुपये निकल गए। ठगी का पता चलने के बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
साइबर अपराधी अक्सर बैंक, क्रेडिट कार्ड, लोन, KYC अपडेट या NOC जैसी सेवाओं का नाम लेकर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे लिंक भेजकर निजी जानकारी भरवाते हैं या ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए कहते हैं, जिससे खाते से रकम निकल सकती है।
इस मामले में पुलिस संदिग्ध लिंक, मोबाइल नंबर और रकम के लेनदेन से संबंधित जानकारी की जांच कर रही है।
फेसबुक विज्ञापन देखकर ऐप डाउनलोड किया, युवक के 50 हजार रुपये निकले
साइबर ठगी का तीसरा मामला कोलार क्षेत्र के गणेश नगर का है। यहां रहने वाले दीपक कुमार ने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन के जरिए उन्होंने एक थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद उनके बैंक खाते से 50 हजार रुपये निकल गए।
इस मामले में भी पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऐप किसने उपलब्ध कराया था और खाते से रकम निकालने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया गया।
यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन भरोसेमंद नहीं होता। किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर, आधिकारिक स्रोत, मांगी जा रही अनुमतियों और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
तीन मामलों में 3.04 लाख रुपये की ठगी
तीनों शिकायतों में सामने आई रकम का विवरण इस प्रकार है:
- अनुराधा कुकरेजा: 1,60,000 रुपये
- मनोज कुमार यादव: 94,300 रुपये
- दीपक कुमार: 50,000 रुपये
कुल रकम: 3,04,300 रुपये।
पुलिस ने तीनों मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि ठगी के लिए किन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, पैसा किन बैंक खातों में पहुंचा और आरोपियों तक कैसे पहुंचा जा सकता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बना रहे हैं। ऐसे में मोबाइल फोन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
- WhatsApp या अन्य मैसेजिंग ऐप पर आई अनजान APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
- बैंक, क्रेडिट कार्ड, NOC या KYC के नाम पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- किसी भी अनजान ऐप को बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील अनुमतियां देने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें।
- OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों के आधार पर बिना जांच-पड़ताल के ऐप डाउनलोड न करें।
- बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और शिकायत दर्ज कराएं।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
अगर किसी के खाते से ऑनलाइन ठगी के जरिए रकम निकल जाती है, तो देरी किए बिना राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। इसके साथ ही आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। जल्द शिकायत करने से लेनदेन को रोकने या रकम की आगे की आवाजाही पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
भोपाल में सामने आए ये तीन मामले डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। अनजान फाइल, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए डाउनलोड किए गए ऐप पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतना ही साइबर ठगी से बचाव का अहम तरीका है।
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