Vidisha Bharti

Header
collapse
...
Home / धर्म एवं संस्कृति / अंधेरा होते ही सितारों-से चमक उठे बच्चे

अंधेरा होते ही सितारों-से चमक उठे बच्चे

17-10-2026  Vidisha Bharti Desk  16 views
अंधेरा होते ही सितारों-से चमक उठे बच्चे

ब्यावरा। पंडाल की रोशनी बुझते ही नन्हे सितारों ने ऐसा जलवा बिखेरा कि दर्शक देखते रह गए। रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाते परिधान, गरबा की धुन पर थिरकते कदम और मां दुर्गा की आराधना में डूबे बच्चों की प्रस्तुति ने माहौल को यादगार बना दिया। ऐसा लगा मानो आसमान के चमकते सितारे धरती पर उतर आए हों। ब्यावरा में पहली बार हुई इस अनूठी प्रस्तुति ने रास गरबा महोत्सव में आकर्षण का नया रंग भर दिया।

रिदम एंड ब्लॉसम एवं सखी क्लब की ओर से आयोजित रास गरबा महोत्सव में बच्चों की इस विशेष प्रस्तुति ने खूब ध्यान खींचा। जैसे ही पंडाल की रोशनी मंद हुई, बच्चों के परिधानों पर लगी रंगीन लाइटें चमक उठीं। संगीत और ताल के साथ एकसाथ घूमते नन्हे कदमों ने पूरे प्रांगण को उत्साह से भर दिया। पारंपरिक गरबा में आधुनिक तकनीक और रचनात्मकता का यह मेल दर्शकों के लिए खास आकर्षण बना।

गरबा के मंच पर बच्चों की प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन

महोत्सव में बच्चों को हर दिन कुछ नया करने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। लाइटिंग वाले परिधानों में गरबा इसी रचनात्मक सोच का उदाहरण बना। बच्चों का उत्साह, सामूहिक तालमेल और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पिछले चार दिनों से चल रहे महोत्सव को शहरवासियों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

नृत्य के साथ अनुशासन और टीम भावना का पाठ

रास गरबा महोत्सव केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास का अवसर भी बन रहा है। सामूहिक नृत्य के दौरान बच्चे एक-दूसरे के कदमों से ताल मिलाना, नियमित अभ्यास करना, समय का ध्यान रखना और टीम के साथ सामंजस्य बनाए रखना सीख रहे हैं। इस तरह सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए उनमें अनुशासन, सहयोग और आत्मविश्वास जैसे गुण भी विकसित हो रहे हैं।

महिलाओं की पहल से साकार हो रहा सांस्कृतिक उत्सव

इस महोत्सव की एक खास पहचान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी है। आयोजन की योजना से लेकर व्यवस्थाओं और बच्चों की प्रस्तुतियों तक महिलाओं की भूमिका दिखाई दे रही है। रिदम एंड ब्लॉसम एवं सखी क्लब की यह पहल बच्चों को मंच देने के साथ भारतीय संस्कृति और पारंपरिक गरबा से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

परंपरा में नए प्रयोग ने बांधा समां

ब्यावरा का रास गरबा महोत्सव भक्ति, परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता का सुंदर संगम बनकर उभरा है। लाइटिंग वाले परिधानों में थिरकते बच्चों ने साबित कर दिया कि उत्सव की खूबसूरती केवल सजावट में नहीं, बल्कि कल्पनाशीलता, प्रतिभा और सामूहिक सहभागिता में भी होती है। पंडाल की रोशनी बुझने के बाद बच्चों की चमक से जगमगाता दृश्य महोत्सव की सबसे यादगार झलक बन गया।


Share:

रिक्वायरमेंट

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy