स्थानीय संपादक वसीम कुरैशी रायसेन/सांची: क्या आपके पास 100 साल पुरानी कोई पांडुलिपि, प्राचीन हस्तलिपि या इतिहास के पन्नों को समेटे हुए कोई दस्तावेज मौजूद है? अगर हाँ, तो अब आपकी यह निजी धरोहर न केवल सुरक्षित रहेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी। भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा शुरू किए गए एक नए डिजिटल अभियान के तहत अब आम जनता से प्राचीन सामग्री को एकत्रित और संरक्षित करने की अपील की गई है।
सांची में कार्यशाला: इतिहास को बचाने का संकल्प
इस अनूठे अभियान की शुरुआत के लिए सांची स्थित महाबोधि सोसाइटी में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में इतिहास प्रेमियों, समाजसेवियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने प्राचीन दस्तावेजों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि हमारे पास मौजूद इतिहास के अवशेषों को डिजिटल युग में सहेजना समय की मांग है।
क्या है पुरातत्व विभाग का 'एप' और कैसे करेगा काम?
भारत सरकार ने प्राचीन और ऐतिहासिक सामग्रियों को एक मंच पर लाने के लिए एक विशेष मोबाइल एप जारी किया है। इस एप का उद्देश्य भारत भर में बिखरी हुई पांडुलिपियों, प्राचीन लेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है।
कैसे अपलोड करें: यदि आपके पास कोई प्राचीन सामग्री है, तो आप इस एप को डाउनलोड कर उसके पहले और अंतिम पृष्ठ को अपलोड कर सकते हैं।
किसे करना चाहिए: इतिहासकार, लेखक, बुद्धिजीवी और वे सामान्य नागरिक जिनके घरों में पुश्तैनी दस्तावेज या पांडुलिपियां मौजूद हैं, वे इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
कलेक्टर ने खुद की दस्तावेजों की परख
कार्यशाला के दौरान नगर के वरिष्ठ समाजसेवी सी.एल. तिवारी, अन्होरी ग्राम के पूर्व सरपंच रामा महाराज और महाबोधि सोसाइटी के प्रभारी वानगल विमलतिस्स नायक थैरो ने लगभग 100 साल से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियां और हस्तलिखित दस्तावेज प्रस्तुत किए। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने इन दस्तावेजों का बारीकी से निरीक्षण किया और उनकी ऐतिहासिक महत्ता की सराहना की। उन्होंने मौके पर ही इन दस्तावेजों को एप पर अपलोड करने की प्रक्रिया को भी समझा।
हर घर तक पहुँचेगी जानकारी
कलेक्टर ने उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अभियान की जानकारी गाँव-गाँव और हर घर तक पहुँचनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि देश के हर कोने में मौजूद प्राचीन सामग्री को एप के माध्यम से एकत्रित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने गौरवशाली अतीत को देख सकें।" एसडीएम मनीष शर्मा ने भी एप के तकनीकी पहलुओं और इसके उपयोग की विधि पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विदिशा भारती की अपील
इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। यदि आपके आसपास या घर में ऐसी कोई प्राचीन सामग्री है जो इतिहास को बयां करती हो, तो उसे छिपाकर न रखें। सरकारी एप का उपयोग करें और अपने परिवार की गौरवशाली धरोहर को राष्ट्रीय संग्रहालय के पन्नों में दर्ज कराएं। यह न केवल आपके दस्तावेजों को सुरक्षित करेगा, बल्कि भविष्य के शोधार्थियों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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