सिरोंज/विदिशा। रिश्तों में बढ़ती दूरी और बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरों के बीच विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर परिवार और अपनत्व की अलग मिसाल पेश करती है। यहां 101 वर्षीय बनिया बाई की देवपुर तीर्थ जाने की इच्छा पूरी करने के लिए उनके परिजन ने ऐसा रास्ता चुना, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उम्र के कारण बनिया बाई 40 किलोमीटर का पैदल सफर नहीं कर सकती थीं, इसलिए परिजन उन्हें प्लास्टिक के टब में बैठाकर पैदल देवपुर तीर्थ लेकर पहुंचे।
यह भावुक कर देने वाली पदयात्रा शमशाबाद तहसील के शाहपुर कॉलोनी गांव से शुरू हुई। सोमवार अलसुबह परिवार के सदस्य बनिया बाई को साथ लेकर देवपुर के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान उनकी बहू सम्पा बाई, पोते विक्रम और निहाल तथा पोता बहू कैलाशी बंजारा बारी-बारी से उन्हें अपने सिर पर बैठाकर आगे बढ़ते रहे। परिवार की अगली पीढ़ी के परपोते और परपोती भी इस यात्रा में साथ रहे।
101 साल की उम्र में बाबा विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा
बताया गया कि 101 वर्षीय बनिया बाई पहले कभी देवपुर तीर्थ नहीं गई थीं। उनके मन में लंबे समय से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने की इच्छा थी। उन्होंने परिवार के सामने पैदल देवपुर जाने की इच्छा जताई। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी उम्र थी।
101 साल की उम्र में 40 किलोमीटर पैदल चलना संभव नहीं था। परिवार ने उनकी इच्छा को टालने के बजाय रास्ता खोजने का फैसला किया। इसी सोच के साथ बनिया बाई को एक प्लास्टिक के टब में बैठाया गया और परिवार पैदल ही देवपुर के लिए निकल पड़ा।
बारी-बारी से सिर पर बैठाकर तय किया सफर
देवपुर तक पहुंचने के लिए परिवार के सदस्यों ने अपनी बुजुर्ग मां को पूरे रास्ते सहारा दिया। बहू सम्पा बाई, पोते विक्रम, निहाल और पोता बहू कैलाशी बंजारा बारी-बारी से बनिया बाई को सिर पर बैठाकर आगे बढ़ते रहे।
इस दौरान परिवार के छोटे सदस्य भी यात्रा का हिस्सा बने। परपोते और परपोती ने भी बुजुर्ग बनिया बाई के साथ देवपुर तक का सफर किया। इससे पदयात्रा केवल एक तीर्थ यात्रा नहीं रही, बल्कि चार पीढ़ियों के एक साथ चलने का भावुक अवसर बन गई।
परिवार की इस कोशिश की जानकारी जैसे ही आसपास के लोगों तक पहुंची, लोग इस यात्रा को लेकर चर्चा करने लगे। बुजुर्ग महिला की इच्छा पूरी करने के लिए परिवार ने जिस तरह सामूहिक प्रयास किया, उसने लोगों का ध्यान खींचा।
मुश्किल सफर के बाद देवपुर पहुंचा परिवार
शाहपुर कॉलोनी से देवपुर तक करीब 40 किलोमीटर का सफर आसान नहीं था। परिवार को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। रास्ते में बनिया बाई को लगातार सहारा दिया गया। परिवार के सदस्य अपनी बारी आने पर उन्हें उठाकर आगे बढ़ते रहे।
लंबी पदयात्रा के बाद जब परिवार देवपुर तीर्थ पहुंचा तो बनिया बाई की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बाबा विश्वनाथ के दर्शन की उनकी इच्छा पूरी हो गई। तीर्थ पहुंचने के बाद उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
परिवार के लिए भी यह क्षण भावुक कर देने वाला था। कई घंटे की मेहनत और लंबी पदयात्रा के बाद जब बनिया बाई ने तीर्थ के दर्शन किए तो परिजनों की खुशी भी देखने लायक थी।
बहू सम्पा बाई बोलीं, अम्मा का बड़ा मन था देवपुर आने का
बनिया बाई की बहू सम्पा बाई ने इस यात्रा को लेकर भावुक होकर कहा कि अम्मा का देवपुर आने का बहुत मन था। परिवार ने उनकी इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया और सभी लोग साथ चल पड़े।
सम्पा बाई के अनुसार, अम्मा की इच्छा पूरी होने के बाद परिवार को भी बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि देवपुर पहुंचने के बाद ऐसा लगा जैसे परिवार की चार पीढ़ियों के चारों धाम पूरे हो गए हों।
उनके इस कथन में बुजुर्ग के प्रति परिवार का लगाव साफ नजर आया। उम्र की सीमा और लंबी दूरी के बावजूद परिवार ने बनिया बाई की इच्छा को महत्व दिया।
चार पीढ़ियां एक साथ, बुजुर्ग की इच्छा बनी परिवार का संकल्प
इस यात्रा की सबसे खास बात परिवार की चार पीढ़ियों की मौजूदगी रही। 101 वर्षीय बनिया बाई से लेकर उनके परपोते और परपोती तक परिवार के सदस्य इस यात्रा में शामिल हुए।
एक तरफ उम्र के इस पड़ाव पर बनिया बाई की तीर्थ यात्रा पूरी हुई, दूसरी तरफ परिवार की नई पीढ़ी को भी अपने बुजुर्ग के साथ धार्मिक यात्रा करने का अवसर मिला। परिवार ने सामूहिक रूप से उनकी इच्छा को अपना संकल्प बनाया।
बुजुर्गों की इच्छाओं को समझने और उनके साथ खड़े होने की जरूरत को यह घटना सामने लाती है। परिवार के सदस्यों ने उनके लिए ऐसा रास्ता निकाला, जिससे उनकी तीर्थ यात्रा पूरी हो सकी।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ सकती है यह तस्वीर
बनिया बाई को टब में बैठाकर परिजनों के पैदल देवपुर जाने की तस्वीर और कहानी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। खासतौर पर बुजुर्ग महिला की उम्र और 40 किलोमीटर की पदयात्रा ने इस घटना को अलग बना दिया है।
आज के समय में जब परिवारों में बुजुर्गों की देखभाल को लेकर कई तरह की खबरें सामने आती हैं, वहीं सिरोंज क्षेत्र की यह घटना परिवार के सदस्यों के बीच लगाव की तस्वीर पेश करती है।
बनिया बाई की इच्छा पूरी करने के लिए बहू, बेटे की अगली पीढ़ी और परपोते-परपोती तक का साथ चलना इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता रही।
देवपुर में पूरा हुआ 101 साल पुराना इंतजार
बनिया बाई के लिए देवपुर की यह यात्रा उम्र के इस पड़ाव पर एक यादगार अनुभव बन गई। बाबा विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा लंबे समय से उनके मन में थी। परिवार के सहयोग से उनका इंतजार पूरा हुआ।
101 साल की उम्र में 40 किलोमीटर की इस तीर्थ यात्रा ने परिवार के रिश्तों की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसमें बुजुर्ग की इच्छा पूरे परिवार की जिम्मेदारी बन गई। बनिया बाई के लिए देवपुर की यह यात्रा केवल तीर्थ दर्शन तक सीमित नहीं रही। यह उनके परिवार के साथ बिताया एक ऐसा यादगार दिन बन गया, जिसे चार पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।
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