विदिशा। "हम अबला नहीं, भारत की वीरांगना हैं!" यह महज एक नारा नहीं, बल्कि उन सैकड़ों महिलाओं के संकल्प की गूंज थी, जो रविवार की शाम विदिशा की सड़कों पर हाथों में मशाल और न्याय की लौ लेकर उतरीं। रीवा में संतों के साथ हुई अप्रिय घटना के विरोध में महिला शक्ति ने मौन रहकर भी अपनी आवाज को बुलंद किया और साफ कर दिया कि आस्था पर प्रहार अब बर्दाश्त नहीं होगा।
माधवगंज से नीमताल तक: मौन में भी दिखी क्रांति की झलक
रविवार रात ठीक 7 बजे, जब शहर की रोशनी मध्यम पड़ रही थी, माधवगंज स्थित जैन मंदिर के सामने से एक विशाल कैंडल मार्च शुरू हुआ। सफेद वस्त्रों में लिपटी और हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां थामे महिलाओं का हुजूम जब सड़क पर निकला, तो हर देखने वाला ठहर गया।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बैनरों के जरिए संदेश दिया कि संत समाज हमारी संस्कृति की धरोहर है और उनकी सुरक्षा के लिए मातृशक्ति किसी भी हद तक मैदान में उतरने को तैयार है। यह मार्च शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ नीमताल स्थित गांधी प्रतिमा पर पहुंचकर संपन्न हुआ। यहाँ बापू की प्रतिमा के समक्ष सभी ने संतों के सम्मान और सुरक्षा की शपथ ली।
कल थमेगा विदिशा: 'संत सुरक्षा' के लिए महा-आंदोलन की तैयारी
प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि रविवार का प्रदर्शन तो बस एक शुरुआत थी। असली हुंकार 25 मई, सोमवार को सुबह 8 बजे भरी जाएगी। रीवा घटना के विरोध में "संत सुरक्षा एवं न्याय" के समर्थन में एक देशव्यापी मौन आंदोलन का आह्वान किया गया है।
आंदोलन की खास बातें:
प्रारंभ: सुबह 8:00 बजे, माधवगंज कांच मंदिर के सामने से।
स्वरूप: पूर्णतः मौन प्रदर्शन और शांतिपूर्ण विरोध।
समर्थन: इस आंदोलन को विदिशा नगर के सर्वधर्म समाज, विदिशा व्यापार महासंघ, विभिन्न राजनीतिक दलों और समाजसेवी संगठनों ने अपना खुला समर्थन दिया है।
व्यापार महासंघ और सर्वधर्म समाज ने मिलाया हाथ
विदिशा की एकता का परिचय देते हुए सकल दिगंबर जैन समाज के साथ-साथ व्यापार महासंघ और सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने इस लड़ाई में साथ आने का फैसला किया है। सोमवार को प्रदर्शन के पश्चात जिला कलेक्टर के माध्यम से भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इस ज्ञापन में संतों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने और रीवा घटना के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की जाएगी। विदिशा के इस बड़े कदम ने शासन और प्रशासन तक स्पष्ट संदेश पहुंचा दिया है कि धर्म और संस्कृति के रक्षकों के साथ पूरा शहर खड़ा है।
नोट: कल सुबह होने वाले इस बड़े आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर भारी भीड़ जुटने की संभावना है।
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