विदिशा जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उम्मीद की एक नई और मजबूत किरण जगी है। आधुनिक दौड़भाग भरी जिंदगी में जब अपनों के बीच रिश्तों की डोर कमजोर पड़ने लगती है और बुजुर्गों को घर के भीतर ही मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, तब न्याय और सुकून दिलाने के लिए एक उम्मीद बनकर सामने आई है 'सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत'। हाल ही में आयोजित इस विशेष पंचायत की बैठक में पारिवारिक कलह और संपत्ति के गंभीर विवादों का समझाइश और काउंसलिंग के जरिए ऐसा सकारात्मक समाधान निकला, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि संवाद से हर बड़ी समस्या को सुलझाया जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के कुशल निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका तिवारी के मार्गदर्शन में संचालित इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, संवेदनशील और आपसी सहमति से निराकरण करना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में कोर कमेटी के अनुभवी सदस्य सचिन गर्ग, डी.के. बाजपेयी, आर.के. कुलश्रेष्ठ, विनोद के. शाह, अजय टण्डन और प्रमोद व्यास ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी सदस्यों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर उनकी समस्याओं को गहराई से सुना और व्यावहारिक समाधान सुझाए।
क्या रहे इस बार के मामले? दिल को झकझोर देने वाली दास्तानें
इस बैठक के दौरान कुल चार प्रमुख प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से दो मामलों ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया। ये मामले परिवारों में बदलती संवेदनाओं और आपसी खटास की बानगी पेश करते हैं।
पहला मामला: बेटे की प्रताड़ना से आहत पिता का दर्द
विदिशा शहर के एक 61 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने पुलिस पंचायत में अपनी व्यथा दर्ज कराई थी। बुजुर्ग पिता का आरोप था कि उनका बेटा न केवल उनके और उनकी पत्नी के साथ लगातार गाली-गलौज और मारपीट करता है, बल्कि पैसों के लिए भी अनुचित दबाव बनाता है। इस तनावपूर्ण और अपमानजनक स्थिति के कारण बुजुर्ग दंपती का जीना मुहाल हो गया था। पिता ने पंचायत के सामने दो टूक शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस माहौल में और अधिक नहीं रह सकते और चाहते हैं कि उनका बेटा अलग निवास करे। वहीं, दूसरी ओर बेटे ने भी अपना पक्ष रखते हुए पिता के अस्वस्थ होने और उनके सही इलाज व देखभाल की बात कही। पंचायत के सदस्यों ने दोनों पक्षों की दलीलें गौर से सुनीं और पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा समझाते हुए दोनों को आगामी निर्धारित तिथि पर फिर से उपस्थित होने के निर्देश दिए, ताकि इस मामले का कोई स्थायी, सुखद और न्यायसंगत हल निकाला जा सके।
दूसरा मामला: गंजबासौदा की बेबस मां और जमीन का पेंच
दूसरा मामला गंजबासौदा से सामने आया, जहां एक बुजुर्ग महिला ने अपने ही बेटे के खिलाफ मोर्चा खोला। आवेदिका का आरोप था कि उनका बड़ा बेटा उनके साथ मारपीट और अभ्रदता करता है, साथ ही उनकी उपजाऊ जमीन पर जबरन कब्जा जमाए बैठा है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि करीब 6 बीघा जमीन बड़े बेटे के नाम दर्ज है, जबकि बुजुर्ग मां अपने एक विकलांग बेटे के साथ जीवन गुजारने को मजबूर हैं। आरोपी बेटा न केवल मां को खेती करने से रोक रहा था, बल्कि किसी अन्य को भी जमीन पर काम नहीं करने दे रहा था। पंचायत ने संवेदनशीलता के साथ दोनों पक्षों को बैठाकर समझाइश दी। इसके बाद आपसी सहमति बनी कि आवेदिका की इच्छा के अनुसार उस भूमि को कोली यानी बटाई या पट्टे पर दिया जाएगा, जिससे बुजुर्ग महिला को आर्थिक संबल और मानसिक शांति मिल सके।
संवाद और संवेदनशीलता से मिल रहा है स्थायी समाधान
इन प्रमुख मामलों के अलावा अन्य प्रकरणों में भी दस्तावेजों की विधिवत जांच और साक्ष्यों की उपस्थिति के आधार पर सुनवाई की गई। सभी संबंधित पक्षों को आवश्यक निर्देश देते हुए अगली तारीख प्रदान की गई है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत यह साबित कर रही है कि अदालती चक्करों की लंबी और थका देने वाली प्रक्रियाओं से दूर, आपसी बातचीत और मनोवैज्ञानिक परामर्श के जरिए रिश्तों में जमी बर्फ को कैसे पिघलाया जा सकता है। विदिशा में यह पहल उन तमाम बुजुर्गों के लिए एक बड़ा संबल बन रही है, जो अपने ही आशियाने में खुद को बेगाना और असहाय महसूस कर रहे थे।
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