आगर मालवा: मध्य प्रदेश की पुलिस के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। आगर मालवा जिले के दो तत्कालीन थाना प्रभारियों (TI) सहित करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ राजस्थान के डग थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद दर्ज हुई FIR ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की जड़ राजस्थान के ग्राम घाटाखेड़ी निवासी हमीद खान की शिकायत में है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 28 जनवरी 2026 को पुलिस द्वारा की गई NDPS (नारकोटिक्स) की कार्रवाई पूरी तरह से फर्जी और अवैध थी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निर्दोषों को फंसाया है।
किन पर दर्ज हुआ मामला?
न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद डग पुलिस ने FIR क्रमांक 154/2026 दर्ज की है। इसमें मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:
शशि उपाध्याय: तत्कालीन कोतवाली टीआई
रूप सिंह राजपूत: तत्कालीन बड़ौद टीआई
इनके अलावा 4 अन्य नामजद पुलिसकर्मी और लगभग 85-90 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
किन धाराओं में फंसी पुलिस?
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को संज्ञेय अपराध माना है। डग पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:
धारा 126(2), 115(2), 131, 201 और 329(4)
दो राज्यों में बनी चर्चा
कोर्ट के इस आदेश ने न केवल आगर मालवा बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में खलबली मचा दी है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने से कानून के रखवाले अब खुद कानून के घेरे में आ गए हैं। फिलहाल, डग पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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