वसीम कुरेशी रायसेन। खेती के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से परेशान किसानों ने सांची में विद्युत मंडल के खिलाफ आवाज उठाई। नगर परिषद क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों ने विद्युत मंडल का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि कृषि कार्यों के लिए निर्धारित 10 घंटे बिजली देने की व्यवस्था के बावजूद उन्हें मुश्किल से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लगातार बिजली कटौती और लोड सेटिंग के कारण खेतों में सिंचाई प्रभावित हो रही है।
किसानों ने चेतावनी भरे अंदाज में “बिजली नहीं तो पैसा नहीं” का नारा देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मांग की कि खेती के लिए बिजली आपूर्ति की पुरानी व्यवस्था फिर से लागू की जाए, ताकि किसानों को दिन और रात दोनों समय निर्धारित अवधि में बिजली मिल सके।
10 घंटे बिजली के बजाय मिल रहे मुश्किल से 5 घंटे
किसानों के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में खेती के लिए 10 घंटे बिजली देने का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें करीब 5 घंटे ही बिजली मिल रही है। किसानों का कहना है कि बार-बार लोड सेटिंग का हवाला देकर बिजली काट दी जाती है। इससे खेतों में सिंचाई का काम समय पर पूरा नहीं हो पाता और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
किसानों ने कहा कि खेती का काम बिजली आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर करता है। यदि निर्धारित समय पर बिजली नहीं मिले तो सिंचाई की योजना प्रभावित होती है। ऐसे में बिजली कटौती का सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ता है और किसानों को अपने कामकाज में बदलाव करना पड़ता है।
नौनाखेड़ी फीडर पर दिन के बजाय रात में बिजली देने पर नाराजगी
ज्ञापन में नौनाखेड़ी फीडर से जुड़े किसानों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। किसानों का आरोप है कि इस फीडर पर दिन में बिजली देने के बजाय रात में आपूर्ति की जा रही है। इसके कारण ग्रामीण किसानों को पूरी रात जागकर खेतों में सिंचाई करनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि रात के समय बिजली मिलने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। रातभर खेतों में जागकर बिजली का इंतजार करना और फिर सिंचाई करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। किसानों ने मांग की कि बिजली आपूर्ति का समय इस प्रकार तय किया जाए, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े और खेती के काम भी व्यवस्थित तरीके से हो सकें।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बिजली आपूर्ति की पूर्व व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि पहले 6 घंटे रात में और 4 घंटे दिन में बिजली दी जाती थी। किसान चाहते हैं कि यही व्यवस्था फिर से शुरू की जाए, ताकि उन्हें दिन और रात दोनों समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध हो सके।
किसानों के मुताबिक, दिन और रात में बिजली मिलने से कृषि कार्यों की योजना बनाना आसान होता है। वहीं, केवल रात में बिजली मिलने की स्थिति में किसानों को देर रात तक खेतों में रहना पड़ता है। उन्होंने विद्युत विभाग से मांग की कि आपूर्ति का समय निर्धारित कर उसका नियमित पालन कराया जाए।
नायब तहसीलदार और विद्युत मंडल प्रभारी को सौंपा ज्ञापन
किसानों ने सांची विद्युत मंडल का घेराव करने के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार और विद्युत मंडल के प्रभारी एस.के. पटेल को सौंपा। ज्ञापन के जरिए किसानों ने बिजली कटौती, निर्धारित अवधि से कम आपूर्ति और नौनाखेड़ी फीडर की समय-सारणी से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया।
किसानों ने मांग की कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए बिजली आपूर्ति में सुधार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि खेती के लिए निर्धारित बिजली समय पर उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि सिंचाई प्रभावित न हो।
कई गांवों के किसान हुए शामिल
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सांची नगर परिषद क्षेत्र सहित आसपास के कई गांवों के किसान शामिल हुए। इनमें ग्राम नागोरी से जवाहर सिंह चौहान, वीरेंद्र तोमर, राजबहादुर सिंह राणा, बद्री प्रसाद राणा, बाबू सिंह राजपूत और तेज सिंह राजपूत प्रमुख रहे।
इसके अलावा सांची क्षेत्र से राजेंद्र सिंह राजपूत, बुंदेल सिंह राजपूत, सीताराम पटेल और गौरव राजपूत; ग्राम खामखेड़ा से अंशु सिंह राजपूत; ग्राम नौनाखेड़ी से कमलेश पटेल, गोलू पटेल और नरेंद्र वर्मा; ग्राम ढकना से शिवेंद्र सिंह राजपूत; ग्राम मेड़की से धर्मचंद लोधी, खुशी लाल लोधी और खिलान सिंह लोधी भी शामिल हुए।
ग्राम कुआं से मानसिंह राजपूत, कुलदीप सिंह राजपूत और कुंवर सिंह राजपूत; ग्राम गुलगांव से मोनू जैन; ग्राम मढ़ा से नरेंद्र सिंह तोमर और भूपेंद्र सिंह तोमर तथा ग्राम पिपरिया से भूपेंद्र सिंह राजपूत सहित अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं रखीं।
अब बिजली आपूर्ति में सुधार का इंतजार
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन और विद्युत विभाग से उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि कृषि कार्यों के लिए निर्धारित 10 घंटे बिजली नियमित रूप से मिले और नौनाखेड़ी फीडर पर दिन में भी बिजली उपलब्ध कराई जाए।
अब देखना होगा कि किसानों की मांगों पर विद्युत विभाग क्या कदम उठाता है और बिजली आपूर्ति की समय-सारणी में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल किसान खेती के लिए पर्याप्त बिजली मिलने और पुरानी व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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