खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रिश्वत की कथित मांग से जुड़े मामले में एक पटवारी को 20 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा है। लोकायुक्त के अनुसार कृषि भूमि के नामांतरण के लिए कथित तौर पर 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। मामले में दो पटवारियों और एक तहसीलदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त इंदौर संभाग की यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश पर भ्रष्टाचार के मामलों में की जा रही कार्रवाई के तहत बताई गई है। ट्रैप कार्रवाई पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के नेतृत्व में आयोजित की गई।
कृषि भूमि के नामांतरण से जुड़ा मामला
लोकायुक्त के अनुसार कसरावद बड़ी, खरगोन निवासी पुनीत नाड़ीवाल ने 25 सितंबर को लोकायुक्त इंदौर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि ग्राम सतावड, तहसील सैगांव में उनकी पत्नी ममता नाड़ीवाल के नाम कृषि भूमि का नामांतरण कराया जाना था।
शिकायत के अनुसार इस काम के लिए तहसीलदार सैगांव अंतरसिंह कनेश ने संबंधित पटवारी से बात करने के लिए कहा। इसके बाद हल्का पटवारी खुम सिंह धारवे के माध्यम से हल्का नंबर 26 के पटवारी कुलदीप यादव से संपर्क होने की बात सामने आई।
लोकायुक्त के मुताबिक नामांतरण की प्रक्रिया के लिए कथित रूप से 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत का सत्यापन कराया गया
शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपों का सत्यापन कराया। लोकायुक्त के अनुसार सत्यापन में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की गई।
टीम ने रिश्वत की पहली किश्त दिए जाने के दौरान आरोपी को पकड़ने की कार्रवाई की।
20 हजार रुपये लेते पटवारी पकड़ाया
लोकायुक्त के अनुसार 28 सितंबर 2026 को खरगोन में शारदा हॉस्पिटल के सामने स्थित श्री पाटीदार मेडिकल के पास ट्रैप कार्रवाई की गई। इस दौरान आरोपी पटवारी खुम सिंह धारवे को कथित रूप से 20 हजार रुपये की पहली किश्त लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
कार्रवाई के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की प्रक्रिया पूरी की। प्रकरण में नामजद अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है।
तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
लोकायुक्त के अनुसार मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें खुम सिंह धारवे, पटवारी हल्का नंबर 5 ग्राम दसनावल, तहसील कसरावद; कुलदीप यादव, पटवारी हल्का नंबर 26 ग्राम पनाली, तहसील सैगांव; और अंतरसिंह कनेश, तहसीलदार सैगांव शामिल हैं।
लोकायुक्त पुलिस ने तीनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 एवं BNS 2023 की धारा 61(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
नामांतरण के लिए रिश्वत मांगने का आरोप
मामला कृषि भूमि के नामांतरण से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। शिकायतकर्ता के अनुसार नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी।
लोकायुक्त टीम अब इस मामले में शिकायत से लेकर कथित रिश्वत मांगने और पहली किश्त लेने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मामले में शामिल बताए गए अन्य आरोपियों की क्या भूमिका रही।
लोकायुक्त टीम ने की कार्रवाई
ट्रैप कार्रवाई में निरीक्षक आशुतोष मिठास के साथ प्रधान आरक्षक विजय, आरक्षक शैलेंद्र सिंह, आशीष नायडू, चंद्रमोहन बिष्ट, मनीष माथुर और श्रीकृष्ण अहिरवार शामिल रहे।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार शिकायत के सत्यापन के बाद पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दावा
लोकायुक्त पुलिस द्वारा समय-समय पर रिश्वत मांगने की शिकायतों पर सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई की जाती है। खरगोन की इस कार्रवाई में भी शिकायत के आधार पर पहले सत्यापन किया गया और इसके बाद कथित रिश्वत की पहली किश्त लेते पटवारी को पकड़ा गया।
फिलहाल प्रकरण में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच लोकायुक्त पुलिस द्वारा की जा रही है। रिश्वत की कथित मांग और आरोपियों की भूमिका के संबंध में अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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