बीना। रेलवे स्टेशनों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए जीआरपी द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इसी कड़ी में बीना रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो कथित गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो बैगों में रखा करीब 8 किलो गांजा बरामद किया गया है। पुलिस ने जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपए बताई है।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध हालत में बैठे हुए थे और उनके पास मौजूद बैगों में गांजा रखा था। सूचना मिलने के बाद जीआरपी की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया। मामले में प्रकरण दर्ज कर गांजे के स्रोत और संभावित सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
मुखबिर की सूचना पर सक्रिय हुई जीआरपी
जीआरपी पुलिस को सोमवार को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बीना रेलवे स्टेशन पर दो संदिग्ध व्यक्ति गांजा लेकर बैठे हुए हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि दोनों के पास दो बैग हैं, जिनमें नशीला पदार्थ रखा हुआ है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन और मार्गदर्शन में थाना प्रभारी हेमलता मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम को तत्काल रेलवे स्टेशन भेजा गया और संदिग्धों की तलाश शुरू की गई।
घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ा
विशेष टीम ने रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। पुलिस के अनुसार, सूचना के आधार पर दोनों संदिग्धों की पहचान की गई और घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया गया।
तलाशी के दौरान दोनों के पास मौजूद दो बैगों से गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने गांजे का वजन करीब 8 किलो बताया है। बरामद मादक पदार्थ को जब्त करने के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
मुंगावली के रहने वाले हैं दोनों आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ, पिता रतिराम विश्वकर्मा और सहदेव, पिता मानसिंह यादव के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मुंगावली के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों आरोपी गांजा लेकर बीना रेलवे स्टेशन क्यों पहुंचे थे और इस खेप को आगे कहां पहुंचाया जाना था।
करीब चार लाख रुपए कीमत का गांजा
जीआरपी के मुताबिक, जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपए है। इतनी मात्रा में गांजा बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है।
जांच में पुलिस गांजे की खरीद, परिवहन और संभावित सप्लाई से जुड़े पहलुओं को खंगाल रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधि में शामिल रहे हैं या नहीं।
कहां से आया गांजा, कहां होना था सप्लाई?
मामले की जांच में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल गांजे के स्रोत और उसकी संभावित मंजिल को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गांजा आरोपियों तक कहां से पहुंचा था और इसे किस व्यक्ति या स्थान पर पहुंचाया जाना था।
रेलवे स्टेशन के जरिए नशीले पदार्थों की आवाजाही की आशंका को देखते हुए जीआरपी अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस मामले से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं या यह खेप उनके स्तर पर ही लाई गई थी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जीआरपी और आरपीएफ टीम की अहम भूमिका
इस कार्रवाई में जीआरपी और आरपीएफ से जुड़े पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जीआरपी की टीम में एएसआई मूलचंद, आरक्षक सचिन श्रीवास्तव, सतपाल सिंह, जितेंद्र सिंह, रवि राठौर, सौरभ श्रीवास्तव और दीवान सिंह शामिल रहे।
वहीं आरपीएफ पोस्ट की ओर से उप निरीक्षक संतोष पटेल, आरक्षक मनजीत और अमित बामने ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
टीम ने सूचना मिलने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए रेलवे स्टेशन पर संदिग्धों की पहचान की और उन्हें गांजे की खेप के साथ पकड़ लिया।
रेलवे के जरिए तस्करी पर पुलिस की नजर
बीना रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां यात्रियों और ट्रेनों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में नशीले पदार्थों की संभावित तस्करी को रोकने के लिए रेलवे पुलिस द्वारा संदिग्ध यात्रियों और सामान पर निगरानी रखी जाती है।
इस कार्रवाई में 8 किलो गांजा पकड़े जाने के बाद पुलिस की जांच का दायरा अब संभावित सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है। आरोपियों से पूछताछ के साथ पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में और कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पूछताछ और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
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