मध्य प्रदेश में साइबर अपराध का सबसे बड़ा मामला सामने आया है। ग्वालियर पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर इक्कीस करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने शाजापुर के एक भाजपा नेता और रतलाम के एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। यह ठगी छह राज्यों तक फैली है। आप इस बड़े घोटाले के तौर-तरीकों को समझें और सतर्क रहें।
ग्वालियर के वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय ने राज्य साइबर पुलिस थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार दिसंबर दो हजार पच्चीस से जुलाई दो हजार छब्बीस के बीच यह ठगी हुई। कुल दो सौ अठारह दिनों तक अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया। एक महिला ने सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ित से दोस्ती की। उसने क्रिप्टो ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया।
महिला के कहने पर पीड़ित ने एक सौ छह ट्रांजेक्शन किए। उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में कुल इक्कीस करोड़ पांच लाख बयानवे हजार रुपये जमा कर दिए। जब पीड़ित ने अपनी निवेश की गई राशि वापस मांगी, तब अपराधियों ने और पैसे जमा करने की मांग की। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है।
पुलिस जांच में इस गिरोह के दो मुख्य चेहरों के नाम सामने आए। शाजापुर से भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय को पुलिस ने पकड़ा। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने सर्व कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति संस्था का बैंक खाता इस गिरोह को दिया था। इसके बदले उसे घर बैठे दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। उसके बैंक खाते में ठगी की इस रकम में से पचास लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। पुलिस जांच बताती है कि यही बैंक खाता देश के छह राज्यों में हुई ग्यारह साइबर ठगी की घटनाओं में उपयोग किया गया था।
रतलाम के इंदिरा नगर निवासी मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को पुलिस ने सागर से गिरफ्तार किया। अंकित इस पूरे गिरोह का मुख्य हैंडलर है। उस पर बैंक खाते किराए पर लेने का और एपीके फाइल के जरिए ओटीपी फॉरवर्ड करवाने का गंभीर आरोप है। ग्वालियर पुलिस, साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारी कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में इस हाई-प्रोफाइल ठगी से जुड़े कई और नाम सामने आएंगे।
इस घटना से आपको सबक लेने की आवश्यकता है। साइबर अपराधी नए तरीकों का उपयोग करके लोगों को fसाते हैं। वे क्रिप्टोकरेंसी निवेश, अनजान लिंक और एपीके फाइलों का सहारा लेते हैं। आप कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी या बैंक खाता साझा न करें। यदि आपको कोई भी ऑनलाइन निवेश योजना बहुत ज्यादा मुनाफा देने का दावा करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखें और किसी भी प्रकार के लालच में न आएं।
साइबर ठगी के ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस लगातार तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है। बैंक खातों के जरिए संदिग्धों की पहचान की जा रही है। आप किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर दें। पुलिस प्रशासन लगातार ऐसे मामलों में कार्रवाई कर रहा है, लेकिन आपकी सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। विदिशा भारती आपको ऐसी हर बड़ी खबर से समय पर अवगत कराता है ताकि आप सुरक्षित रहें।
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