
संवाददाता: अवनीश शर्मा
गैरतगंज ब्लॉक के ग्राम पंचायत हैदरी स्थित एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शौचालयों की दुर्दशा ने स्वच्छ भारत मिशन और सर्व शिक्षा अभियान के दावों की पोल खोल दी है। विद्यालय के शौचालय वर्षों से बंद पड़े हैं और इनमें अब पेड़-पौधे उग आए हैं। गंदगी का यह आलम बच्चियों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर कर रहा है।
बच्चियों की मजबूरी, मनचलों का जमावड़ा
खुले में शौच जाने के कारण बच्चियों को असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। आसपास के मनचलों का जमावड़ा स्कूल के पास आम हो गया है, जिससे बच्चियों और उनके परिजनों में अनहोनी की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति न केवल स्वच्छता के मुद्दे को उजागर करती है, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।
ग्राम पंचायत की लापरवाही
ग्राम पंचायत हैदरी के सरपंच और सचिव अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्वच्छ भारत मिशन और सर्व शिक्षा अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
सर्व शिक्षा अभियान की हकीकत
शिक्षा के अधिकार और स्वच्छता अभियान के तहत स्कूलों में शौचालय निर्माण पर जोर दिया गया था। लेकिन रायसेन जिले में कई शौचालय केवल दिखावे तक ही सीमित हैं। साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में ये शौचालय अब सफेद हाथी बन चुके हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा पर सवाल
डॉक्टर प्रभुराम चौधरी जैसे विकासपुरुष की छवि को ठेस पहुंचा रहे अधिकारी और कर्मचारी कब अपनी जिम्मेदारी समझेंगे? यह सवाल अब क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
निष्कर्ष और अपील
बच्चियों की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। ग्राम पंचायत और शिक्षा विभाग को मिलकर स्कूल के शौचालय की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि बच्चियों को असुविधा और असुरक्षा से बचाया जा सके।