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विदिशा: नीलांजना की मृत्यु देख वैराग्य की ओर बढ़े आदिकुमार

2026-03-14  Editor Shubham Jain  151 views

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विदिशा। अध्यात्म और श्रद्धा के संगम तीर्थ विदिशा में इन दिनों भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा है कि हर आंख सजल है और हर हृदय प्रभु भक्ति में सराबोर है। भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान 'दीक्षा कल्याणक' के अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने संसार की असारता और गुरु भक्ति की शक्ति पर मार्मिक प्रकाश डाला।

नीलांजना का नृत्य और वैराग्य का उदय

मुनि श्री ने प्रवचन के दौरान उस भावुक क्षण का वर्णन किया जब राजदरबार में अप्सरा नीलांजना का नृत्य चल रहा था। उन्होंने कहा, "नीलांजना का दृश्य देखा, उसकी आकस्मिक मृत्यु हुई और संसार की नश्वरता का भान होते ही प्रभु आदिकुमार ने दीक्षा लेकर वन की ओर गमन करने का कठोर निर्णय लिया।" मंच पर जब नीलांजना की आयु पूर्ण होने और देवताओं द्वारा रंग में भंग न पड़ने देने के लिए दूसरी नर्तकी भेजने का दृश्य जीवंत हुआ, तो उपस्थित जनसमूह स्तब्ध रह गया। संसार की इस मोह-माया को त्यागकर जब आदिकुमार वन की ओर बढ़े, तो 'वैराग्य पथ' के उस दृश्य ने भक्तों के अंतर्मन को झकझोर दिया।

'बर्रो वाले बाबा' का चमत्कार: जब क्रेन भी हो गई थी फेल

मुनि श्री संभवसागर महाराज ने बर्रो वाले बाबा के नए मंदिर में प्रवेश की घटना को कुंडलपुर के 'बड़े बाबा' के ऐतिहासिक गगन विहार से जोड़ते हुए एक विस्मयकारी संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि जब बर्रो वाले बाबा की प्रतिमा को क्रेन से उठाने का प्रयास किया जा रहा था, तब घंटों की मशक्कत के बाद भी बाबा टस से मस नहीं हुए।

मुनि श्री ने कहा, "तभी एक अनजान व्यक्ति ने कान में आकर कहा कि बाबा केवल आचार्य विद्यासागर जी महाराज की बात सुनते हैं। जैसे ही हमने गुरुदेव का स्मरण किया, उसी क्षण बाबा अपने आसन से हिल गए और उनका भव्य गगन विहार प्रारंभ हो गया।" यह अद्भुत दृश्य न केवल विदिशा बल्कि यूट्यूब के माध्यम से दुनिया भर के हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी आँखों से देखा।

देवों का अदृश्य सहयोग और बाबा की मुस्कान

मुनि श्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब उन्होंने नए मंदिर में बाबा के दर्शन किए, तो ऐसा लगा मानो बाबा मुस्कुरा रहे हों। उन्होंने विश्वास दिलाया कि गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न हो रहे हैं। इस महायज्ञ में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि अदृश्य रूप से देव भी सहयोग कर रहे हैं।

आयोजन की झलकियां और आगामी कार्यक्रम

  मंचासीन मुनि संघ: मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही।

  विशेष उपस्थिति: जबलपुर श्राविका आश्रम की बहनों ने मुनिसंघ को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।

  प्रस्तुति: प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया एवं तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में कलाकारों ने राजपाट, राज्य व्यवस्था और वन गमन के दृश्यों को सजीव कर दिया।

कल होगा केवलज्ञान कल्याणक:

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 15 मार्च (रविवार) को केवलज्ञान कल्याणक मनाया जाएगा। इस दिन भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति होगी और भव्य समवसरण की रचना की जाएगी, जहाँ भगवान की दिव्य वाणी खिरने का सौभाग्य भक्तों को मिलेगा।

पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष राजेश बोहरा और महामंत्री अनिरुद्ध सराफ सहित पूरी टीम ने धर्मप्रेमी बंधुओं से रविवार को केवलज्ञान और सोमवार को मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है।


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