विदिशा। प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता को मोहल्ला स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शुरू की गई संजीवनी क्लिनिक योजना विदिशा में सरकारी लेटलतीफी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शहर के प्रसिद्ध महल घाट के पास लाखों रुपये की लागत से तैयार क्लिनिक का नया भवन आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
भवन तैयार, फिर भी जनता बेहाल
महल घाट क्षेत्र में रहने वाले हजारों रहवासियों को उम्मीद थी कि इस क्लिनिक के खुलने से उन्हें छोटे-मोटे इलाज के लिए जिला अस्पताल की लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा। विडंबना यह है कि क्लिनिक का भवन बनकर तैयार हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का श्रीगणेश नहीं हो सका है। वर्तमान में यह आलीशान सरकारी इमारत धूल फांक रही है और इसके गेट पर लटका भारी-भरकम ताला सिस्टम की संवेदनहीनता को बयां कर रहा है।
असामाजिक तत्वों का बन रहा अड्डा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्लिनिक चालू न होने के कारण इसके आसपास अब असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है। लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति देखरेख के अभाव में खराब हो रही है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब भवन बनकर पूरी तरह तैयार है, तो फिर प्रशासन इसे जनता को समर्पित करने में देरी क्यों कर रहा है? क्या विभाग किसी 'खास मुहूर्त' का इंतजार कर रहा है या फिर यहाँ स्टाफ की तैनाती कागजों में ही सिमट कर रह गई है?
क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस संजीवनी क्लिनिक को तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए, ताकि महल घाट और आसपास के गरीब मरीजों को राहत मिल सके।