
विदिशा, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त एवं प्रबंध संचालक, कुमार पुरुषोत्तम, ने आज कृषि उपज मंडी समिति विदिशा का औचक निरीक्षण किया। इस अप्रत्याशित दौरे से मंडी प्रशासन और व्यापारियों में हड़कंप मच गया, क्योंकि उनका मुख्य जोर व्यवस्थाओं की गुणवत्ता और किसानों के हित पर था।
सुविधाओं का जायजा, व्यवस्थाओं पर सख्ती
आयुक्त पुरुषोत्तम ने नवीन मंडी प्रांगण, मिर्जापुर में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने विशेष रूप से सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और भावांतर भुगतान योजना की तैयारियों की समीक्षा की। इस निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और मंडी का संचालन पूरी तरह से पारदर्शी हो।
उन्होंने उपस्थित व्यापार संघ के पदाधिकारियों से सीधे संवाद किया और उन्हें सख्त निर्देश दिए कि फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) स्तर के सोयाबीन की अधिकतम बिक्री सुनिश्चित की जाए। यह निर्देश किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भावांतर योजना और सोयाबीन बिक्री की स्थिति
निरीक्षण के दौरान, आयुक्त को जिले में चल रहे किसान पंजीयन और उपज बिक्री की अद्यतन जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि विदिशा जिले में 59,418 कृषकों ने भावांतर भुगतान योजना के तहत पंजीयन कराया है। इनमें से अब तक 5,811 किसानों ने 1,07,594 क्विंटल सोयाबीन का विक्रय किया है।
इस जानकारी के आधार पर, पुरुषोत्तम ने मंडी सचिव को निर्देश दिए कि विपणन गतिविधियों का संचालन पूरी तरह से सुचारू हो और सभी शासकीय योजनाओं की प्रभावी निगरानी की जाए। उनका स्पष्ट संदेश था कि किसानों के लिए बनी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें धोखाधड़ी से बचाना बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फोकस किसान हित पर: ‘बिचौलियों की नहीं चलेगी’
आयुक्त पुरुषोत्तम ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह औचक निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य किसान हित को सर्वोपरि रखना है। उन्होंने मंडी प्रशासन को निर्देश दिए कि वे सक्रिय रूप से बिचौलियों की गतिविधियों पर लगाम लगाएं और यह सुनिश्चित करें कि किसान सीधे और बिना किसी अनावश्यक परेशानी के अपनी उपज बेच सकें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लें और उनका त्वरित समाधान करें। उन्होंने मंडी सचिव को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भुगतान प्रक्रिया समय पर पूरी हो, ताकि किसानों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान कल्याण उनके निरीक्षण के मुख्य मंत्र रहे।
उच्चाधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण औचक निरीक्षण के दौरान मंडी बोर्ड और जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस दौरे की गंभीरता को दर्शाते हैं। उपस्थित अधिकारियों में अपर कलेक्टर अनिल कुमार डामोर, मंडी की संयुक्त संचालक सविता झानिया, अधीक्षण यंत्री मधुकर पवार, अनुविभागीय अधिकारी शितिज शर्मा, कार्यपालन यंत्री बालमुकुंद कुशराम, उपसंचालक कृषि केशव खपेडिया, सहायक संचालक लक्ष्मण वास्केल और मंडी सचिव नीलकमल वैद्य शामिल थे।
इस दौरे से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य प्रदेश में कृषि विपणन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उच्च स्तर पर सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। मंडी प्रशासन को अब इन निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित करना होगा।