
विदिशा, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक 20 वर्षीय हिंदू युवती ने जिले की जनसुनवाई में पहुंचकर स्वेच्छा से मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए आवेदन दिया। युवती ने दावा किया है कि यह फैसला उसने किसी दबाव या प्रलोभन में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और गहन अध्ययन के आधार पर लिया है। यह मामला अब मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ा दिया गया है, जिसने जिले के प्रशासनिक और पुलिस अमले को सकते में डाल दिया है।
तीन साल से पढ़ रही है नमाज और कलमा
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर अंशुल गुप्ता के समक्ष शमशाबाद तहसील के बरुआखार गांव की निवासी 20 वर्षीय युवती आशा प्रजापति ने धर्म परिवर्तन की अनुमति का आवेदन सौंपा। कक्षा 10वीं पास आशा ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि वह पिछले तीन वर्षों से मुस्लिम धर्म की प्रार्थना पद्धति यानी नमाज और कलमा पढ़ रही है।
युवती ने बताया कि मुस्लिम धर्म में उसकी रुचि बचपन से ही रही है। आवेदन में उसने अपने व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उसने बताया कि बचपन में ही उसकी मां का देहांत हो गया था और लगभग एक साल पहले उसके पिता का भी निधन हो गया। उसकी एक नाबालिग बहन इस समय नाना के पास रह रही है, जबकि आशा का अपने किसी भी अन्य रिश्तेदार से कोई संपर्क नहीं है।
> "यह फैसला मेरा निजी और स्वैच्छिक है। मैंने आत्मिक शांति और अध्ययन के बाद यह निर्णय लिया है। मेरे ऊपर न कोई दबाव है और न ही कोई प्रलोभन," युवती ने आवेदन में ज़ोर दिया।
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मामले की गंभीरता, सीधे SP ऑफिस भेजा
कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए तुरंत आवेदन को गंभीरता से लिया। उन्होंने युवती को तत्काल पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय भेज दिया। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि या अवैध धर्मांतरण का मामला न हो, अब पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम संयुक्त रूप से युवती की काउंसलिंग कर रही है।
प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि युवती का यह फैसला पूरी तरह से स्वैच्छिक है या नहीं।
धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत होगी पूरी प्रक्रिया
यह पूरा मामला अब मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के दायरे में आ गया है। इस अधिनियम के तहत, धर्म परिवर्तन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन देना अनिवार्य होता है। इसके बाद, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होता है कि धर्म परिवर्तन बिना किसी बल, प्रभाव, प्रलोभन या धोखे के किया जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, युवती की काउंसलिंग रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विदिशा में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए आवेदन देने का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त काउंसलिंग में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।