
फतेहपुर। शादी का माहौल था, ढोल-नगाड़े, घोड़ी की टापें और रिश्तेदारों की गहमागहमी... लेकिन बारात जैसे ही बहुआ कस्बे के जवाहर नगर पहुंची, वहां रच गई एक ऐसी कहानी, जो फिल्मी स्क्रिप्ट को भी मात दे दे!
कानपुर देहात से आए संजय कुमार की बारात में सब कुछ ठीक चल रहा था। तिलक से जयमाला तक सब व्यवस्थित – लेकिन तभी सीन में एंट्री हुई दूल्हे के बहनोई सत्यप्रकाश की, जिनका अंदाज़ देखकर लगा कि वो रिश्तेदारी निभाने नहीं, स्क्रिप्ट बिगाड़ने आए हैं।
शुरुआत हंगामे से हुई – रस्मों के बीच गाली-गलौज, झगड़े, और नेग-रिवाज पर बखेड़ा खड़ा कर दिया। पंडित भी परेशान, मंत्रों की जगह गालियों की गूंज! रात बीती तो सुबह और सनसनीखेज बनी – नशे में धुत्त बहनोई ने कार चढ़ाने की कोशिश की, जिससे पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया।
दुल्हन मुस्कान ने बिना झिझक फैसला लिया – “अब ये शादी नहीं होगी।” रिश्तेदारों ने समझाया, पंचायतें बैठीं, मगर लड़की टस से मस नहीं हुई। नतीजा – विदाई तो दूर, फेरों से पहले ही रिश्ता तोड़ दिया गया।
शांति के लिए दोनों पक्षों में सहमति बनी – दूल्हे ने शादी में खर्च 1.53 लाख लौटाया, और बदले में चढ़ावे के गहने व कपड़े वापस लिए। पुलिस ने भी मामला शांत बताया।
अब शादी तो नहीं हुई, लेकिन बहनोई की हरकतों ने इस बारात को बना दिया चर्चित – एक ऐसी दास्तान, जो बताती है कि कभी-कभी शादी के मंच पर असली विलेन साइड रोल में छिपा होता है।