करैरा (शिवपुरी): सरकारी सेवा में अक्सर अधिकारी और कर्मचारी के बीच एक फासला देखा जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने मानवता और सम्मान की नई मिसाल पेश की है। यहाँ एक एसडीएम ने अपने वाहन चालक की विदाई को इतना यादगार बना दिया कि देखने वालों की आँखें भर आईं।
जब करैरा एसडीएम अनुराग निंगवाल के वाहन चालक देवी सिंह यादव की सेवानिवृत्ति का समय आया, तो साहब ने प्रोटोकॉल किनारे रख दिया। एसडीएम खुद ड्राइविंग सीट पर बैठे और अपने रिटायर होने वाले ड्राइवर को सम्मान के साथ बगल वाली सीट पर बैठाकर उनके घर तक छोड़ने गए।
42 साल की निष्ठा का मिला 'शाही' सम्मान
देवी सिंह यादव ने शासन की सेवा में अपने जीवन के करीब 42 साल समर्पित किए। इस लंबे सफर के दौरान उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि एक दर्जन से अधिक एसडीएम के साथ काम किया। चुनौतीपूर्ण रास्तों और कठिन ड्यूटी के बीच देवी सिंह की निष्ठा कभी कम नहीं हुई। उनकी इसी कार्यकुशलता और ईमानदारी के मुरीद वर्तमान एसडीएम अनुराग निंगवाल भी थे।
विदाई समारोह में छलक आए आंसू
31 दिसंबर को देवी सिंह की सेवा का आखिरी दिन था। नए साल के पहले दिन कार्यालय में उनके लिए एक भव्य विदाई पार्टी आयोजित की गई। पार्टी में एसडीएम और अन्य स्टाफ ने उनके काम की सराहना की। लेकिन असली सरप्राइज तो अभी बाकी था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब घर जाने की बारी आई, तो एसडीएम अनुराग निंगवाल ने चाबी खुद थाम ली।
उन्होंने देवी सिंह से कहा, "आज आप अधिकारी की तरह बैठिए, आज गाड़ी मैं चलाऊंगा।" जैसे ही एसडीएम ने गाड़ी स्टार्ट की और देवी सिंह को उनके घर तक सुरक्षित छोड़ा, वहाँ मौजूद हर शख्स इस पल का गवाह बनकर भावुक हो गया। देवी सिंह की आँखों में खुशी और गर्व के आंसू थे। उन्होंने कहा कि उनके पूरे करियर का यह सबसे सुखद और गौरवशाली पल है।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
इस अनोखी विदाई की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। लोग एसडीएम अनुराग निंगवाल के इस व्यवहार की सराहना कर रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी चुपचाप घर चले जाते हैं, लेकिन इस तरह का सम्मान अन्य अधिकारियों के लिए भी एक सीख है कि अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का सम्मान करना ही असली लीडरशिप है।
> "कर्मचारी केवल काम करने वाली मशीन नहीं होते, वे विभाग का परिवार होते हैं। देवी सिंह जी ने दशकों तक शासन की सेवा की है, उन्हें सम्मान के साथ विदा करना मेरा सौभाग्य है।" > — अनुराग निंगवाल, एसडीएम करैरा