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स्वास्थ्य सेवाओं पर कलेक्टर का 'एक्शन' मोड! विदिशा कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश - "मरीज परेशान हुए तो खैर नहीं!"

2025-12-16  Reporter vidisha Raghvendra Dangi  418 views

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विदिशा: अब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ? कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ली क्लास; सुविधाओं में कमी आने पर होगी कड़ी कार्रवाई!
विदिशा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के बेतवा सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने जिले के स्वास्थ्य अमले को दो टूक और स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका स्पष्ट आदेश है कि मरीज किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से परेशान न हों और उन्हें समय पर समुचित इलाज तथा सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।


⚠️ शिकायत आई तो सीधी कार्रवाई
कलेक्टर  गुप्ता ने बैठक में मौजूद जिला और खंड स्तर के सभी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिला अस्पताल हो या जिले की कोई अन्य स्वास्थ्य संस्था, यदि यह शिकायत प्राप्त होती है कि मरीज को स्वास्थ्य उपचार नहीं मिला, या भर्ती के समय उसे कंबल जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हुई, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अभी सर्द हवाओं का मौसम है और ठंड लगातार बढ़ रही है, इस बात को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने सिविल सर्जन को विशेष रूप से निर्देशित किया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी मरीजों को पर्याप्त कंबल उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे सर्दी से राहत पा सकें और उनका उपचार ठीक से हो सके। यह निर्देश दिखाता है कि कलेक्टर अस्पताल में मरीजों के लिए बेहतर और मानवीय स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


🚑 एंबुलेंस और प्रसूति सेवाओं पर विशेष फोकस
कलेक्टर  अंशुल गुप्ता ने 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस सहित स्वास्थ्य विभाग की अन्य वाहन सुविधाओं के संचालन की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि मरीजों को लाने-ले जाने के लिए एंबुलेंस समय पर स्वास्थ्य संस्थानों में पहुँचनी चाहिए। इसके अलावा, गर्भवती माताओं को प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक लाने के प्रबंध भी समय पर सुनिश्चित किए जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को इस कार्य की गंभीरता समझाते हुए कहा कि "मरीज की जान बचाना ही हमारा नैतिक दायित्व होना चाहिए।" इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी को अत्यंत गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।


💉 टीकाकरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही टीकाकरण कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जिन आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) द्वारा टीकाकरण कार्यों में लापरवाही बरती गई है, उनकी पहचान कर सीएमएचओ (CMHO) को उन पर नोटिस जारी करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


👶 कुपोषित बच्चों के लिए '14 दिन' अनिवार्य
बैठक में एनआरसी (NRC) वार्ड में क्रियान्वित कार्यों की भी समीक्षा हुई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के संस्थागत प्रबंधन के लिए, उन्हें कम से कम 14 दिनों तक वार्ड में भर्ती रखा जाए। उन्होंने साफ किया कि सात, आठ या दस दिन में बच्चों को पूरा स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है, इसलिए बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का पूर्ण लाभ मिल सके, इसके लिए निर्धारित दिवस अवधि तक भर्ती रखना अनिवार्य है।


कलेक्टर  अंशुल गुप्ता की यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रशासन अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में इन सख्त निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है, यह देखने लायक होगा।


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