
सांची, [वसीम कुरेशी]। सांची सिविल अस्पताल में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की बदहाली ने मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा दी है. 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस जैसी जीवनरक्षक सेवाएं अब सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं, जिससे जरूरतमंदों को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है.
एंबुलेंस का इंतजार, घंटों की देरी:
अस्पताल में आपात स्थिति में एंबुलेंस बुलाने पर अक्सर गाड़ी समय पर नहीं पहुंचती. इससे गंभीर मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल लाना पड़ता है, जो उनके जीवन के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है.
जननी एक्सप्रेस खराब, गर्भवती महिलाएं परेशान:
स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जननी योजना के तहत मिलने वाली एंबुलेंस सेवा भी कई दिनों से खराब पड़ी है. इसका सीधा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह समस्या और भी विकट है.
चालकों का दुर्व्यवहार भी एक मुद्दा:
कुछ एंबुलेंस चालकों के दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है. आपातकालीन सेवाओं में ऐसे व्यवहार से सार्वजनिक विश्वास कम होता जा रहा है.
अधिकारी बोले - जल्द होगी कार्रवाई:
इस गंभीर मुद्दे पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. रवि राठौर ने स्वीकार किया कि 108 सेवा को लेकर उन्हें कई शिकायतें मिली हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस समस्या पर कब तक विराम लगा पाता है, ताकि सांची के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके.