
राजगढ़ | मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भ्रष्टाचार की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई है। मत्स्य महासंघ की जिलाधिकारी सुरेखा सराफ पर आरोप है कि वो अपने अस्थायी सहायक के ज़रिए हर महीने लाखों रुपये की रिश्वत वसूल रही थीं। लोकायुक्त की टीम ने जब सुरेखा के सहायक मुबारिक गौरी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा, तो इस गोरखधंधे की परतें खुलने लगीं।
जानकारी मिलते ही सुरेखा सराफ घर और दफ्तर से फरार हो गईं, और उनका मोबाइल नंबर भी अब ‘स्विच ऑफ’ है।
हर महीने मांगे जाते थे 3 लाख रुपए
इंदौर निवासी और वार्ड 58 के पार्षद अनवर कादरी ने लोकायुक्त को शिकायत दी थी कि कुंडालिया डैम में मिले सात साल के मछली पालन ठेके के एवज में सुरेखा सराफ हर महीने तीन लाख रुपये रिश्वत मांग रही थीं। भारी दबाव और काम में अड़चनों के चलते मोलभाव कर एक लाख रुपये में बात तय हुई, लेकिन अब चार महीने की बकाया रकम—चार लाख रुपये—एक साथ मांगी जा रही थी।
काम करने दो, वरना टेंडर कैंसिल!
अनवर का आरोप है कि रिश्वत न देने पर उन्हें टेंडर रद्द करने की धमकी दी जा रही थी। जाल बिछाकर लोकायुक्त ने सुरेखा सराफ के सहायक को रिश्वत लेते पकड़ा। अब सुरेखा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 और 12 में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
अब तक फरार है ‘रिश्वत की रानी’
लोकायुक्त की टीमें सुरेखा सराफ की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सुरेखा सराफ की गिरफ्तारी हो सकती है।