शिवपुरी (करैरा)। साइबर अपराध की दुनिया में 'डिजिटल अरेस्ट' और 'हनीट्रैप' के जरिए लोगों को बर्बाद करने वाले एक बड़े गिरोह का करैरा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ऐसे 4 शातिर ठगों को दबोचा है जो फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर और अश्लील वीडियो के नाम पर लोगों से लाखों रुपये वसूल रहे थे।
कैसे बिछाते थे ठगी का जाल?
पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ है, वह चौंकाने वाला है। पकड़े गए आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने महिलाओं के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बना रखे थे।
हनीट्रैप: पहले ये आरोपी लोगों को व्हाट्सएप पर लुभाते थे और उनसे अश्लील वीडियो कॉल या रिकॉर्डिंग करवाते थे।
डिजिटल गिरफ्तारी का डर: एक बार रिकॉर्डिंग होने के बाद खेल शुरू होता था। आरोपी खुद को बड़े पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन करते थे।
गंभीर धाराओं की धमकी: ठग पीड़ितों को डराते थे कि उनके खिलाफ बलात्कार (Rape) और चाइल्ड पोर्नोग्राफी (Child Pornography) जैसे गंभीर केस दर्ज होने वाले हैं।
केस सेटलमेंट का सौदा: बदनामी और जेल जाने के डर से घबराया पीड़ित जब पैर पकड़ता, तो ये 'केस सेटलमेंट' के नाम पर मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।
इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
करैरा पुलिस की सतर्कता से पकड़े गए आरोपियों में गांव के ही युवा शामिल हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल अपराध के लिए कर रहे थे:
प्रिंस राय (24 वर्ष): पुत्र संतोष राय, निवासी टीला, थाना करैरा।
राहुल लोधी (25 वर्ष): पुत्र रूपसिंह लोधी, निवासी कुचलोन।
अजेन्द्र लोधी (25 वर्ष): पुत्र कीरत लोधी, निवासी टीला, थाना करैरा।
अंकेश लोधी: पुत्र कीरत लोधी, निवासी टीला, थाना करैरा।
पुलिस की अपील: डरे नहीं, सूचना दें
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई कानून अस्तित्व में नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करता और न ही पैसों की मांग करता है। यदि कोई आपको अश्लील वीडियो या पुलिस केस के नाम पर डराए, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर सेल को सूचित करें।