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पीएम आवास की किस्त के बदले मांगे थे 5000 रुपये, घूसखोर सचिव को कोर्ट ने सुनाई 3 साल की जेल

2026-01-10  Editor Shubham Jain  435 views

ImgResizer_1768012028485छतरपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए छतरपुर की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की रुकी हुई किस्त जारी करने के बदले रिश्वत मांगने वाले ग्राम पंचायत कदारी के तत्कालीन सचिव भरत वर्मा को अदालत ने दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला साल 2019 का है। ग्राम पंचायत कदारी के निवासी जगत यादव का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। कुल 1,50,000 रुपये की स्वीकृत राशि में से जगत को 1,20,000 रुपये मिल चुके थे। लेकिन अंतिम किस्त के रूप में बाकी बचे 30,000 रुपये उसके खाते में डालने के लिए सचिव भरत वर्मा 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा था।

हितग्राही जगत यादव घूसखोर सचिव को पैसे नहीं देना चाहता था, बल्कि उसे रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने 18 मार्च 2019 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सागर में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।

लोकायुक्त का जाल और डिजिटल रिकॉर्डिंग

शिकायत मिलते ही लोकायुक्त टीम एक्शन मोड में आ गई। सत्यापन के लिए आवेदक को एक डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर दिया गया। रिकॉर्डिंग के दौरान सचिव ने 5,000 रुपये की मांग दोहराई और मौके पर 1,000 रुपये ले लिए। बाकी के 4,000 रुपये लेकर उसे अगले दिन बुलाया गया।

ट्रैप की कार्रवाई: रंगे हाथों धराया सचिव

19 मार्च 2019 को लोकायुक्त की टीम ने छतरपुर के चौबे तिराहे के पास घेराबंदी की। आरोपी सचिव ने आवेदक को चौबे नर्सिंग होम के पास बुलाया। जैसे ही जगत यादव ने रिश्वत के 4,000 रुपये सचिव को दिए और इशारा किया, पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने भरत वर्मा को दबोच लिया।

जब आरोपी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलाया गया, तो उसका रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण था कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था। आरोपी ने वह राशि अपनी पैंट की दाहिनी जेब में छिपाकर रखी थी।

न्यायालय का सख्त फैसला

विशेष लोक अभियोजक अभिषेक मेहरोत्रा ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए ठोस सबूत और गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए। मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी भरत वर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत दोषी पाया।

अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित सजा सुनाई:

 * 3 वर्ष का सश्रम कारावास (कठोर जेल)

 * 5,000 रुपये का अर्थदंड

यह फैसला उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो गरीबों के हक की राशि में से हिस्सा मांगते हैं। शासन की योजनाओं का लाभ जनता तक बिना किसी बाधा के पहुंचे, इसके लिए न्यायपालिका का यह रुख अत्यंत सराहनीय माना जा रहा है।


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