
गुना, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के गुना जिले में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक परेशान किसान ने अपनी गिरवी रखी जमीन पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर कलेक्ट्रेट परिसर में ही इल्ली मार दवा (जहर) का सेवन कर लिया। यह सनसनीखेज घटना जनसुनवाई के दौरान हुई, जब किसान की गुहार अनसुनी कर दी गई। आनन-फानन में किसान को गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
दबंगों के 'चंगुल' में 4 बीघा जमीन
पीड़ित किसान की पहचान अर्जुन ढीमर (निवासी ग्राम सगोरिया) के रूप में हुई है। अर्जुन का आरोप है कि उनकी यह दुर्दशा साल 2009 से शुरू हुई, जब उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया था। बेटे के इलाज के लिए उन्होंने गांव के ही एक रसूखदार व्यक्ति के पास अपनी लगभग 4 बीघा जमीन एक लाख रुपए में गिरवी रखी थी।
अर्जुन ढीमर का आरोप है कि 2009 से लेकर आज तक, यानी 16 साल बीत जाने के बाद भी, वह व्यक्ति उनकी जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठा है और जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। किसान का कहना है कि अब यह दबंग व्यक्ति इस लेन-देन को 3 लाख रुपए का मामला बता रहा है।
> "मेरी जमीन धोखे से गलत लिखा-पढ़ी करवाकर हड़पी जा रही है। हम गरीब आदमी हैं, लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।" – अर्जुन ढीमर (पीड़ित किसान)
>
कोर्ट का आदेश भी बेअसर
पीड़ित किसान के अनुसार, मामला न्यायालय में भी गया था। कोर्ट ने जमीन पर स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) दिया था, लेकिन दबंग उस आदेश की भी परवाह नहीं कर रहा है। अर्जुन का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में लगातार उनकी उपेक्षा कर रहा है और दबंग व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
लगातार हो रही इस परेशानी और न्याय न मिलने की निराशा से तंग आकर किसान अर्जुन ने मंगलवार को यह आत्मघाती कदम उठाया।
कलेक्ट्रेट में हड़कंप, पुलिसकर्मी बने रहे तमाशबीन
मंगलवार दोपहर लगभग 12 बजे, किसान अर्जुन जनसुनवाई में अपनी गुहार लगाने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वहाँ भी उनकी बात नहीं सुनी गई। सुनवाई न होने से हताश अर्जुन ने आवेश में आकर जनसुनवाई कक्ष के सभागृह के दरवाजे पर ही अपने साथ लाई हुई इल्ली मार दवा (कीटनाशक) पी ली।
जैसे ही किसान ने जहरीला पदार्थ खाया, वहाँ मौजूद एक आरक्षक ने तुरंत सीसी छीन ली। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद पुरुष पुलिसकर्मी और अन्य कर्मचारी पूरा घटनाक्रम देखते रहे। शर्मनाक बात यह रही कि वे किसी भी तरह का खास सहयोग या तत्परता दिखाने के बजाय तमाशबीन बने रहे।
हालांकि, इसी बीच वहाँ मौजूद एक महिला सुरक्षाकर्मी ने तुरंत हिम्मत दिखाई। उन्होंने तत्काल अर्जुन को संभाला और काफी देर तक उनकी देखभाल करती रहीं। उनकी त्वरित प्रतिक्रिया की बदौलत ही किसान को जल्द से जल्द मदद मिल सकी। घटना की जानकारी मिलते ही डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुँची और एंबुलेंस के माध्यम से किसान अर्जुन ढीमर को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, किसान अर्जुन की हालत अब स्थिर है और वह खतरे से बाहर हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और दबंगों के आगे लाचार आम आदमी की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि कलेक्ट्रेट जैसे परिसर में भी किसान को न्याय की जगह जहर खाने को मजबूर होना पड़े, तो वह न्याय के लिए और कहाँ जाए? प्रशासन को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।