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निकाह का 'नंबर गेम': भोपाल की महिला को 4 शादियां करना पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की कठोर जेल

2026-01-24  Editor Shubham Jain  214 views

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भोपाल। राजधानी की जिला अदालत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। निकाह के नाम पर धोखाधड़ी और अपनी पिछली शादियों का सच छिपाना एक महिला को महंगा पड़ गया। भोपाल कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी महिला हसीना को दोषी करार दिया और उसे 2 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मेघा अग्रवाल की अदालत ने 19 जनवरी 2026 को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक स्थिति छिपाकर दूसरा निकाह करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है।

वकील पति को दिया झांसा, शादी के बाद खुला राज

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फरियादी तबरेज उल्लाह (जो स्वयं भोपाल जिला न्यायालय में अधिवक्ता हैं) ने अपनी पत्नी के खिलाफ मोर्चा खोला।

निकाह की तारीख: 27 मई 2022 को दोनों का निकाह हुआ था।

क्या छिपाया सच: निकाह से पहले हसीना ने दावा किया था कि उसका केवल एक पति (सलमान) था और उससे उसका तलाक हो चुका है।

हकीकत: शादी के कुछ समय बाद ही घर में कलह शुरू हो गई। हसीना अपनी बेटियों को घर ले आई और फरियादी के परिवार पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया।

भाई की आत्महत्या ने मामले को बनाया ‘क्राइम थ्रिलर’

शादी के महज डेढ़ महीने बाद ही घर का माहौल नर्क बन गया। फरियादी के भाई ने इस मानसिक प्रताड़ना और रोज-रोज के झगड़ों से तंग आकर आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना के बाद जब परिवार ने हसीना की कुंडली खंगाली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

जांच में मिले 4 निकाह के सबूत: शमशेर से लेकर साबिर तक

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और गहन जांच में यह सामने आया कि हसीना ने फरियादी से पहले एक-दो नहीं, बल्कि चार अलग-अलग व्यक्तियों से निकाह किया था:

शमशेर

मतलूब हसन

सलमान

साबिर

कोर्ट को गुमराह करने का नाकाम दांव:

जब कोर्ट में हसीना से इन चार नामों के बारे में पूछा गया, तो उसने बचने के लिए एक अजीब दलील दी। उसने कहा कि ये सभी नाम एक ही व्यक्ति के हैं। हालांकि, वह इस दावे का कोई सबूत नहीं दे पाई और कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश करार दिया।

तलाक के कागज थे गायब, सबूतों ने बदली बाजी

ट्रायल के दौरान यह साबित हुआ कि हसीना के पास अपने किसी भी पूर्व पति से वैधानिक तलाक के दस्तावेज नहीं थे। फरियादी ने उज्जैन और भोपाल की अदालतों से पुराने केसों की प्रमाणित प्रतियां निकलवाईं, जिससे यह साफ हो गया कि वह बिना तलाक लिए ही निकाह पर निकाह कर रही थी।

अदालत की टिप्पणी: “पूर्व वैवाहिक संबंधों को जानबूझकर छिपाना भारतीय न्याय संहिता की धारा 82(2) के तहत अपराध है। ऐसी धोखाधड़ी समाज और विवाह संस्था के भरोसे को तोड़ती है।”

सजा और आगे की राह

अदालत ने दोषी हसीना को 2 साल की सख्त सजा और जुर्माने से दंडित किया है। हालांकि, सजा के तुरंत बाद उसे निचली अदालत से जमानत मिल गई है, जिससे वह ऊपरी अदालत में अपील कर सके। लेकिन भोपाल के कानूनी गलियारों में इस 'बहु-विवाह' कांड और कोर्ट के कड़े फैसले की चर्चा हर जुबान पर है।


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