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मध्य प्रदेश में 'डिजिटल अरेस्ट' का चौंकाने वाला मामला: BJP नेता के बेटे ने 8 साल में गंवाए ₹45 लाख!

2025-07-21  Editor Shubham Jain  738 views

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अनूपपुर, मध्य प्रदेश: डिजिटल फ्रॉड का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में एक भाजपा नेता के बेटे को पूरे 8 साल तक 'डिजिटल अरेस्ट' करके रखा गया. इस दौरान उनसे अलग-अलग किस्तों में ₹45 लाख की भारी-भरकम रकम ऐंठ ली गई. यह घटना अनूपपुर के कोतमा की है, जहां इलेक्‍ट्रॉनिक कारोबारी आशीष ताम्रकार (53) को ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी, जज, हाईकोर्ट वकील और पुलिस अधिकारी बताकर ब्लैकमेल किया.

कैसे हुई ₹45 लाख की 'डिजिटल डकैती'?

कोतमा नगर के भाजपा नेता अवधेश ताम्रकार के बेटे आशीष ताम्रकार की बाजार में इलेक्‍ट्रॉनिक की दुकान है और वे वायदा बाजार में भी निवेश करते थे. साल 2017 में उन्हें ₹23 लाख मिले, जिसकी भनक ठगों के गिरोह को लग गई.

थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला के मुताबिक, ठगों ने सबसे पहले नीमच थाने के अधिकारी बनकर आशीष को फोन किया. उन्होंने ₹23 लाख की रकम को 'हवाला की रकम' बताकर धमकाया और सारे पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए.

इसके बाद तो ठगों ने हद ही कर दी! वे लगातार अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते रहे और आशीष को 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देते रहे. इस दौरान वे स्क्रीन पर फर्जी पुलिस, जज, सीबीआई अधिकारी बनकर नाटक करते और पुलिस का सायरन भी बजाते. बेचारा डरा-सहमा व्यापारी गिरफ्तारी के डर से उनकी हर मांग पूरी करता रहा और देखते ही देखते कुल ₹45 लाख विभिन्न खातों में जमा करवा दिए. आखिरकार, जून महीने में परेशान होकर आशीष ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस ने एक आरोपी को दबोचा, गिरोह के और सदस्य फरार

अनूपपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और मोबाइल नंबरों के आधार पर कार्रवाई करते हुए विदिशा जिले से एक आरोपी सौरभ शर्मा (32) को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने सौरभ के पास से लैपटॉप, मोबाइल और ठगी से जुड़े कई दस्तावेज भी जब्त किए हैं. सौरभ को शुक्रवार को न्यायालय में पेश कर चार दिन की रिमांड पर लिया गया है.

पुलिस अधीक्षक मोतिउरहान रहमान ने बताया कि इस मामले में शामिल मुख्य सरगना महेंद्र शर्मा (26) और उसके साथी रवि डेहरिया की पहले ही मौत हो चुकी है. महेंद्र शर्मा की साल 2022 में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी और उसके खिलाफ विदिशा व अन्य जिलों में 30 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे. रवि डेहरिया की भी दो महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई.

पुलिस अब इस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों, जिनमें लकी कुमावत (सतवास पुनासा, खंडवा) और चित्रांश ठाकुर शामिल हैं, उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है.

फर्जी कंपनियों का जाल बिछाकर करते थे ठगी

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह साइबर ठगी के लिए भोपाल में 'आरबी ट्रेडर्स' और 'तिरुपति फिनटेक' जैसी फर्जी कंपनियाँ खोलते थे. उनका मकसद पूरा सेटअप बनाकर चोरी-छिपे साइबर ठगी और 'डिजिटल अरेस्ट' को अंजाम देना था. जब भोपाल में इन फर्जी कंपनियों की भनक लगने लगी, तो वे वहाँ से भागकर विदिशा में नए नाम से कंपनियाँ खोल लेते थे.

गिरफ्तार आरोपी सौरभ शर्मा खुद ठगी के साथ-साथ प्राइवेट काम और जमीन दलाली भी करता था. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे साइबर ठग भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और उन्हें आर्थिक व मानसिक रूप से तोड़ देते हैं.

क्या आप भी ऐसी किसी 'डिजिटल अरेस्ट' या साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं? नीचे कमेंट्स में हमें बताएं.


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