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गाजियाबाद से रिपोर्ट | न्यूज डेस्क
देश के सबसे चर्चित मंदिर-मस्जिद विवादों में हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अब सीधे तौर पर भारत के संविधान, ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और धर्मांतरण जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर एक विस्तृत मांगपत्र सार्वजनिक किया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के 391वें राज्याभिषेक दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जैन ने मथुरा-काशी, भोजशाला, संभल जैसे विवादित स्थलों को मुक्त कराने के साथ-साथ संविधान में बदलाव, अल्पसंख्यक मंत्रालय को समाप्त करने और धर्मांतरण पर रोक लगाने की मांग उठाई।
🔴 मंदिरों की मुक्ति का बिगुल: काशी, मथुरा और भोजशाला का मुद्दा फिर गरमाया
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि काशी और मथुरा को भी अयोध्या की तर्ज पर "मुक्त" किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "काशी और मथुरा केवल आस्था के स्थल नहीं हैं, ये भारतीय सनातन संस्कृति की प्रतीक स्थली हैं। इन्हें विधिवत मुक्त कराना समय की मांग है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि संभल और भोजशाला जैसे स्थानों पर चल रहे विवादों को न्यायिक प्राथमिकता दी जाए और इन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाया जाए ताकि निर्णय शीघ्रता से हो सके।
⚖️ संविधान की प्रस्तावना पर सवाल – 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्द हटाने की मांग
कार्यक्रम के दौरान जैन ने एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की मूल प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' जैसे शब्द नहीं थे, बल्कि इन्हें 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया। उनके अनुसार, “इन शब्दों को जोड़ने की प्रक्रिया असंवैधानिक थी और अब वक्त है कि इन्हें हटाया जाए ताकि संविधान की मूल भावना को पुनर्स्थापित किया जा सके।”
उनकी दलील यह भी रही कि यदि संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, तो फिर धर्म विशेष के आधार पर 'अल्पसंख्यक अधिकार' क्यों होने चाहिए?
📜 अल्पसंख्यक मंत्रालय और आयोग पर भी सवाल – ‘संवैधानिक असंतुलन का कारण’
जैन ने केंद्र सरकार से यह मांग की कि 'अल्पसंख्यक मंत्रालय' और 'राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग' को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यह मंत्रालय संविधान की मूल भावना के विपरीत है और देश में "सांवैधानिक असंतुलन" पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 29 और 30 को संविधान में जोड़ने के पीछे क्या मानसिकता थी, यह भी एक बार सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना चाहिए।
उनका तर्क था कि जब भारत सभी नागरिकों को समानता देता है, तो अलग से अल्पसंख्यकों को विशेष संरक्षण देना अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन करता है।
🚨 धर्मांतरण पर चिंता – “सोची-समझी साजिश के तहत हो रहा है विस्तार”
विष्णु शंकर जैन ने धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि “भारत में संगठित तरीके से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है और यह देश की सांस्कृतिक अखंडता के लिए खतरा है।” उन्होंने केंद्र सरकार से एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की मांग की और कहा कि जो लोग लालच, डर या धोखे से धर्मांतरण करवा रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
🕉️ मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर बोले – “सबूत हमारे पास हैं, जल्द हो निर्णय”
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर विष्णु शंकर जैन ने दो टूक कहा, “हमारे पास सभी दस्तावेज़, साक्ष्य और प्रमाण मौजूद हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि विवादित स्थल श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही स्थित है। अब यह मामला कोर्ट में है और हमारी मांग है कि इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाए ताकि जल्द निर्णय हो सके।”
उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को लेकर फैसला हुआ, उसी प्रकार मथुरा और काशी को भी ऐतिहासिक न्याय मिलना चाहिए।
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🔍 निष्कर्ष: ‘संविधानिक पुनरावलोकन’ और ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ की मांग
विष्णु शंकर जैन के इस वक्तव्य को केवल धार्मिक आस्था से जोड़कर देखना एक पक्षीय दृष्टिकोण होगा। दरअसल, यह एक गहन वैचारिक और संवैधानिक बहस की शुरुआत है जिसमें भारत की पहचान, उसकी संस्कृति, और संविधान की व्याख्या जैसे विषय शामिल हैं।
उनकी मांगें चाहे विवादास्पद लगें, लेकिन यह तथ्य है कि वह एक वकील के रूप में अपने पक्ष को प्रमाणों और तर्कों के साथ रख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर इस मांगपत्र को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
🚨 Disclaimer: यह रिपोर्ट सार्वजनिक उपलब्ध बयानों और साक्षात्कारों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की कानूनी या धार्मिक टिप्पणी का उद्देश्य नहीं है। न्यूज पोर्टल इस विषय पर सभी पक्षों की राय को प्रमुखता से प्रकाशित करने का पक्षधर है।