
नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम् के गायन और वादन के लिए पहली बार एक विस्तृत नियमावली (गाइडलाइंस) जारी की है। इस नए आदेश के तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे 6 छंदों को गाना या बजाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि यह 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लिया गया है। अब तक राष्ट्रगान (जन गण मन) के लिए तो स्पष्ट प्रोटोकॉल थे, लेकिन राष्ट्रीय गीत के लिए ऐसी कोई औपचारिक नियमावली नहीं थी।
राष्ट्रगान से पहले होगा वंदे मातरम् का गायन
गृह मंत्रालय द्वारा जारी 10 पृष्ठों के इस ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि:
सभी सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम् बजाया जाएगा।
वंदे मातरम् का पूरा संस्करण, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है, प्रस्तुत करना होगा।
गीत के दौरान उपस्थित सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
यह आदेश सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
तीन श्रेणियों में बांटे गए कार्यक्रम
मंत्रालय ने इस आदेश को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए कार्यक्रमों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
1. अनिवार्य प्रस्तुति (Strict Compliance):
नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन एवं प्रस्थान के समय, और आकाशवाणी/दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में 6 छंदों वाला वंदे मातरम् अनिवार्य होगा। सैन्य बैंड द्वारा वादन के समय 7 कदमों वाली विशेष 'ड्रम रोल' की थाप भी दी जाएगी।
2. सामूहिक गायन (Mass Singing):
स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य सांस्कृतिक परेडों में सामूहिक गायन को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षित गायक दलों (Choir) की व्यवस्था करने और सही साउंड सिस्टम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
3. शिक्षण संस्थानों में विकल्प:
स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् गायन के साथ की जा सकती है ताकि नई पीढ़ी में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति गौरव का भाव जागृत हो।