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मातृत्व की पुकार! चलती ट्रेन में शुरू हुई प्रसव पीड़ा, बासौदा स्टेशन पर रोकी गई एक्सप्रेस; स्वास्थ्य टीम ने बचाई माँ और नवजात की जान

2025-11-30  Reporter vidisha Raghvendra Dangi  456 views

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विदिशा (मध्य प्रदेश): अक्सर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें निर्धारित समय पर ही रुकती हैं, लेकिन कल रात बासौदा रेलवे स्टेशन पर एक ऐसी इमरजेंसी ने मुंबई की ओर जा रही एक एक्सप्रेस ट्रेन को तत्काल रोक दिया, जिसने मानवीय संवेदना और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता की मिसाल पेश की है। ट्रेन में सफर कर रही एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके बाद रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने ट्रेन के कोच को ही एक अस्थाई 'प्रसव कक्ष' में बदल दिया और माँ-बच्चे दोनों को सुरक्षित जीवनदान दिया।

स्टेशन बना 'डिलीवरी रूम': बासौदा में स्वास्थ्य टीम की त्वरित कार्रवाई

यह घटना कल रात करीब 10:15 बजे की है। मुंबई जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन बासौदा स्टेशन के पास से गुजर रही थी कि तभी ट्रेन के भीतर एक गर्भवती यात्री की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। स्थिति की गंभीरता और यात्री की चीखों को सुनकर सह-यात्रियों ने तुरंत रेलवे अधिकारियों को सूचित किया। बासौदा सीएमओ ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रेलवे अधिकारियों से सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू कर दी।

रेलवे अधिकारियों ने स्थिति की नाजुकता को समझते हुए ट्रेन को तत्काल बासौदा स्टेशन पर रोक दिया। सूचना मिलते ही मैटरनिटी स्टाफ की एक विशेषज्ञ टीम को जननी एक्सप्रेस के साथ तुरंत स्टेशन भेजा गया। अंधेरे और स्टेशन के असामान्य माहौल के बीच, स्वास्थ्य टीम ने गजब की तत्परता दिखाई। ट्रेन के एक कोच में ही महिला के लिए सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था की गई। विशेषज्ञ स्टाफ ने पेशेवर तरीके से मोर्चा संभाला और कुछ ही देर में ट्रेन के कोच में एक सुरक्षित प्रसव संपन्न कराया गया।

नाजुक हालात: कम हीमोग्लोबिन और नवजात का कम वजन

सुरक्षित प्रसव के बाद, माँ और नवजात को प्राथमिक उपचार और विस्तृत जांच के लिए तुरंत सिविल अस्पताल बासौदा लाया गया। अस्पताल में की गई जांचों के दौरान सामने आए स्वास्थ्य मापदंडों ने चिंता बढ़ा दी। डॉक्टरों ने पाया कि प्रसव के बाद महिला का हीमोग्लोबिन स्तर बेहद कम, मात्र 4 ग्राम था, जो एक गंभीर एनीमिया की स्थिति है। वहीं, नवजात शिशु का वजन भी सामान्य से काफी कम था, जो उसकी नाजुक सेहत का संकेत दे रहा था।

डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए तुरंत फैसला लिया। रात में ही माँ और नवजात दोनों को बेहतर और विशेष उपचार के लिए जिला अस्पताल विदिशा रेफर कर दिया गया। दोनों की जान बचाने के लिए अब विदिशा के विशेषज्ञ डॉक्टरी टीम सघन निगरानी में उनका इलाज कर रही है।

तत्परता की मिसाल: 'Jansampark MP' ने दी जानकारी

स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित और साहसी कार्रवाई ने एक संभावित गंभीर मेडिकल इमरजेंसी को सफलतापूर्वक संभाल लिया। यदि ट्रेन को समय पर नहीं रोका जाता और स्वास्थ्य टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंचती, तो माँ और नवजात दोनों के लिए स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आपातकाल की स्थिति में सरकारी तंत्र कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग (Jansampark Madhya Pradesh) ने भी स्वास्थ्य विभाग और रेलवे की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। यह घटना मानवीय सहयोग, सरकारी विभागों के बीच समन्वय और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन बचाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

बासौदा और विदिशा जिले के लोग इस सफल प्रसव पर स्वास्थ्य टीम की तारीफ कर रहे हैं। उम्मीद है कि माँ और नवजात दोनों जल्द ही पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर लौटेंगे।


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