भोपाल। नए साल की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वैचारिक मंथन का केंद्र बनने जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 2 और 3 जनवरी को भोपाल के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। बीते 10 महीनों में भागवत का यह पांचवां एमपी दौरा है, जो राज्य में संघ की बढ़ती सक्रियता और आगामी रणनीतियों की ओर बड़े संकेत दे रहा है।
इस बार का दौरा केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डॉ. भागवत सीधे तौर पर युवाओं, मातृशक्ति और समाज के प्रबुद्ध वर्ग से रूबरू होंगे। सूत्रों की मानें तो संघ प्रमुख इस बार 'इंटरैक्शन मोड' में रहेंगे, यानी वे लोगों के तीखे और महत्वपूर्ण सवालों के जवाब भी देंगे।
2 जनवरी: युवा शक्ति के साथ राष्ट्र निर्माण पर मंथन
दौरे के पहले दिन का केंद्र बिंदु कुशाभाऊ ठाकरे सभागार होगा। यहाँ 'भारत प्रांत' के 16 जिलों से आए उन चुनिंदा युवाओं का जमावड़ा लगेगा जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशेष पहचान बनाई है।
* विशेष संवाद: डॉ. भागवत युवाओं से राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर चर्चा करेंगे।
* प्रश्नोत्तर सत्र: शाम के सत्र में लगभग 1500 प्रबुद्धजनों के बीच संघ प्रमुख का संबोधन होगा। यहाँ उपस्थित लोगों को प्रश्न पूछने की अनुमति होगी, जिससे यह कार्यक्रम एक जीवंत संवाद में तब्दील हो जाएगा।
* लक्ष्य: संघ का उद्देश्य औपचारिक भाषण के बजाय युवा नेतृत्व का वास्तविक परीक्षण करना और उन्हें प्रेरित करना है।
3 जनवरी: सामाजिक समरसता और मातृशक्ति का संगम
प्रवास के दूसरे दिन का एजेंडा सामाजिक एकजुटता पर केंद्रित रहेगा। भोपाल में आयोजित होने वाले सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
* दो सत्रों का संबोधन: डॉ. भागवत दो अलग-अलग सत्रों को संबोधित करेंगे, जिनका मुख्य विषय 'हिंदू समाज की एकजुटता' और 'सामाजिक समरसता' होगा।
* शक्ति सम्मेलन: शाम के वक्त एक विशेष 'शक्ति सम्मेलन' आयोजित किया जाएगा। इसमें राष्ट्र के विकास और परिवार निर्माण में मातृशक्ति (महिलाओं) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
* समापन: वैचारिक मंथन के इन महत्वपूर्ण सत्रों के बाद संघ प्रमुख भोपाल से प्रस्थान करेंगे।
क्यों खास है भागवत का यह दौरा? (Analysis)
संघ के जानकारों का मानना है कि भागवत का बार-बार मध्य प्रदेश आना महज संयोग नहीं है। इसके पीछे कई गहरे कारण हैं:
* संघ का शताब्दी वर्ष: RSS अपने 100 साल पूरे करने जा रहा है, ऐसे में संगठन के विस्तार के लिए एमपी एक मजबूत गढ़ है।
* युवा और महिला केंद्रित रणनीति: संघ अब अपनी परंपरागत छवि से इतर युवाओं और आधुनिक महिलाओं को जोड़ने पर फोकस कर रहा है।
* 2026 का रोडमैप: माना जा रहा है कि इस संवाद से साल 2026 के लिए एक बड़ी सामाजिक और राष्ट्रीय दिशा तय की जाएगी।
* सामाजिक समरसता: जातिगत समीकरणों को दरकिनार कर 'हिंदू समाज की एकजुटता' का संदेश देना संघ की प्राथमिकता है।
राजनीतिक हलचल: भागवत के इस दौरे ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। चुनावी राजनीति से दूर रहने का दावा करने वाला संघ, जिस तरह से समाज के निर्णायक वर्गों (युवा और महिला) को साध रहा है, उसका असर आने वाले समय में प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक आबोहवा पर पड़ना तय है।