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मुरैना में दिल दहला देने वाला मामला: मृतक के परिजनों का MP पुलिस पर लापरवाही का गंभीर आरोप, गांव में मातम और आक्रोश

2025-11-09  Amit raikwar  421 views

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मुरैना, मध्य प्रदेश: रिश्तों की जटिलता और सामाजिक दबाव ने एक सीधे-सादे पिता की जान ले ली। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के दिमनी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 45 वर्षीय एक व्यक्ति ने अपने बेटे के प्रेम-प्रसंग के चलते मिल रही लगातार धमकियों से टूटकर आत्महत्या कर ली। यह घटना एक गंभीर सामाजिक त्रासदी और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।
सिधारे का पूरा गांव में शुक्रवार की सुबह 45 वर्षीय अशोक माहौर का शव गांव के बाहर एक नीम के पेड़ से लटका मिला, जिसके बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया।
प्रेम-प्रसंग बना मौत का कारण
मिली जानकारी के अनुसार, अशोक माहौर का बेटा आकाश माहौर गांव की ही एक शादीशुदा महिला साधना वाल्मीकि (21 वर्ष) को लेकर फरार हो गया था।
* विवाद की जड़: महिला, साधना वाल्मीकि, मूलचंद वाल्मीकि के बेटे राजवीर की पत्नी है।
* लापता होने की तारीख: साधना 1 नवंबर को अपने मायके भिंड जिले के नयागांव सगरा बेहड़ से लापता हुई थी।
* आरोप: साधना के गायब होने का सीधा आरोप आकाश माहौर पर लगा।
महिला के ससुराल पक्ष यानी वाल्मीकि परिवार ने अशोक माहौर को सीधी धमकियाँ देना शुरू कर दिया था। परिजनों के मुताबिक, वाल्मीकि परिवार लगातार यह धमकी दे रहा था कि अगर उनकी बहू (साधना) को जल्द से जल्द नहीं लौटाया गया, तो वे पूरे माहौर परिवार को खत्म कर देंगे।
इन जानलेवा धमकियों और असहनीय मानसिक दबाव के चलते, अशोक माहौर बुरी तरह टूट चुके थे और अंततः उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
गुरुवार रात गए और सुबह मिला शव
परिजनों ने बताया कि बुधवार की रात अशोक घर पर खाना खाने के बाद यह कहकर निकले थे कि वह खेत पर जा रहे हैं। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। गुरुवार तड़के करीब पांच बजे, एक ग्रामीण ने खेतों की ओर जाते समय नीम के पेड़ से एक शव लटका देखा। पहचान करने पर पता चला कि वह अशोक माहौर ही थे।
शव मिलने की खबर से गांव में मातम छा गया और लोग आक्रोशित हो गए।
परिजनों का गंभीर आरोप: पुलिस ने नहीं की मदद
मृतक अशोक के भाई राजेंद्र सिंह ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया:
> "वाल्मीकि परिवार पिछले तीन-चार दिनों से लगातार हमें धमकियाँ दे रहा था। हमने दिमनी थाने में इसकी सूचना देने और मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई।"

राजेंद्र सिंह ने आगे बताया कि शुक्रवार सुबह जब शव मिला, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन घंटों तक कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
> "करीब दो घंटे बाद, सिर्फ एक आरक्षक डायल 112 की गाड़ी से पहुंचा और उसने फंदे से शव को उतरवाया। इसके बाद, हमें ग्रामीणों के खर्चे पर एक गाड़ी भाड़े पर लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाना पड़ा।"

सवाल के घेरे में पुलिस की भूमिका
गांववालों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि लगातार धमकियाँ मिलने की शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई। ग्रामीणों का कहना है कि अशोक एक सीधा-सादा व्यक्ति था, जो बेटे के कृत्य से पहले ही शर्मिंदा था और धमकियों से मानसिक रूप से चूर हो गया था।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि दिमनी पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप किया होता, धमकी देने वालों पर कार्रवाई की होती, या अशोक को सुरक्षा दी होती, तो शायद एक निर्दोष जान बच सकती थी।
फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की गहन जांच की बात कह रही है, लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल गांव के हर कोने में गूंज रहे हैं।
 


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