
मण्डला। मध्य प्रदेश के मण्डला जिले में आज कलेक्ट्रेट परिसर उस वक्त अखाड़ा बन गया जब जिले के तमाम पटवारी लामबंद होकर प्रदर्शन करने उतर आए। पटवारी संघ ने जिला प्रशासन और एक रसूखदार व्यवसायी (कथित समाजसेवक) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का कहना है कि यदि उनके साथी पटवारी को न्याय नहीं मिला, तो यह लड़ाई अब मुख्यमंत्री और आला मंत्रियों के दरवाजे तक पहुंचेगी।
क्या है पूरा विवाद? साठगांठ के गंभीर आरोप
पूरा मामला पटवारी संदीप कुशवाहा से जुड़ा है। आरोप है कि एक रसूखदार व्यापारी, जो खुद को समाजसेवक बताता है, उसकी जिला प्रशासन में गहरी पैठ है। पटवारी संघ के अध्यक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कतरा स्थित एक जमीन को लेकर उक्त व्यवसायी द्वारा पटवारी संदीप कुशवाहा पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। जब पटवारी संदीप उनके दबाव में नहीं आया, तो जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से उसे निलंबित कर दिया गया।
निलंबन और बहाली का 'बैकडेट' खेल?
पटवारी संघ का दावा है कि प्रशासन ने अपनी गलती छिपाने के लिए एक अजीब कदम उठाया। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा और पटवारियों का आक्रोश बढ़ा, तो आनन-फानन में पटवारी को बहाल कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि बहाली का आदेश 15 दिसंबर की बैक डेट (पिछली तारीख) में जारी किया गया है। संघ का सवाल है कि यदि पटवारी दोषी था तो बहाली क्यों? और यदि निर्दोष था तो दो महीने तक उसे मानसिक प्रताड़ना क्यों दी गई?
मानसिक संतुलन खो रहा है साथी पटवारी
प्रदर्शनकारी पटवारियों ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में कहा कि पिछले दो महीनों से जारी इस प्रताड़ना के कारण संदीप कुशवाहा का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। वह असहज महसूस कर रहा है। संघ का आरोप है कि जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी एक उद्योगपति के इशारे पर अपने ही मातहत कर्मचारियों का दमन कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट में नारेबाजी और उग्र आंदोलन की चेतावनी
आज दोपहर जब बड़ी संख्या में पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो वहां गहमा-गहमी का माहौल बन गया। पहले मूक प्रदर्शन और फिर जोरदार नारेबाजी के जरिए पटवारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया। पटवारी संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ मौखिक प्रदर्शन है। अगर दोषी व्यापारी और अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही नहीं हुई, तो मण्डला पटवारी संघ उग्र आंदोलन करेगा।
प्रमुख मांगें:
* दोषी व्यवसायी/कथित समाजसेवक पर दबाव बनाने के लिए कार्यवाही हो।
* साठगांठ में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।
* पीड़ित पटवारी को मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना और पूर्ण सम्मान मिले।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस विरोध के बाद क्या कदम उठाता है या फिर यह चिंगारी राजधानी भोपाल तक पहुंचकर सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ी करती है।