
भोपाल, 14 मई 2025: राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए एक महिला पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शहर के एक पॉश इलाके लालघाटी स्थित हिमांशु टावर की पार्किंग में की गई, जहां आरोपी महिला पटवारी सुप्रिया जैन फरियादी से रिश्वत की रकम ले रही थी। इस कार्रवाई ने राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फरियादी मोहम्मद असलम, निवासी ग्राम मुबारकपुर, तहसील हुजूर, जिला भोपाल, ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि पटवारी सुप्रिया जैन उससे 18 एकड़ कृषि भूमि के सीमांकन के एवज में 36,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रही हैं। सुप्रिया जैन, हल्का क्रमांक-4, परवलिया सड़क, तहसील हुजूर, में पदस्थ हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, सुप्रिया ने रिश्वत की राशि प्रति एकड़ 2000 रुपये के हिसाब से मांगी थी और शुरूआती भुगतान के तौर पर 10,000 रुपये नकद देने को कहा था। फरियादी ने जब इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की, तब एक योजनाबद्ध ट्रैप की तैयारी शुरू की गई।
कैसे रचा गया ट्रैप?
लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत की पुष्टि के बाद एक विशेष टीम का गठन किया और पूरी रणनीति के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही सुप्रिया जैन ने फरियादी से 10,000 रुपये की रिश्वत ली, टीम ने तुरंत दबिश दी और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।
यह पूरी कार्रवाई सुप्रिया जैन के निवास स्थान हिमांशु टावर, लालघाटी की पार्किंग में हुई। रिश्वत की रकम मौके पर ही बरामद कर ली गई। टीम ने पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई में ठोस सबूत प्रस्तुत किए जा सकें।
लोकायुक्त की कार्रवाई का असर
भोपाल लोकायुक्त की यह कार्रवाई उन तमाम शिकायतों पर लगाम कसने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखी जा रही है, जो राजस्व विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा आम लोगों से रिश्वत मांगने को लेकर सामने आती रहती हैं।
लोकायुक्त एसपी के अनुसार, “हम भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार की जाएंगी। आम नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध मांग की शिकायत बेहिचक लोकायुक्त कार्यालय में करें।”
कौन हैं सुप्रिया जैन?
सुप्रिया जैन तहसील हुजूर के परवलिया सड़क हल्का क्रमांक-4 में बतौर पटवारी पदस्थ हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उनके खिलाफ पहले भी कुछ मौखिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन ठोस सबूतों के अभाव में कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
अब जब रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया है, तो लोकायुक्त की टीम ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में जनता की भूमिका अहम
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता की सतर्कता और सक्रियता से ही भ्रष्टाचार पर लगाम संभव है। यदि मोहम्मद असलम समय रहते शिकायत नहीं करते और लोकायुक्त में विश्वास नहीं दिखाते, तो शायद यह मामला दब जाता और भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहता।
राज्य सरकार ने भी बीते कुछ महीनों में लोकसेवकों की जवाबदेही तय करने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए हैं। डिजिटल सीमांकन, भू-अभिलेखों का ऑनलाइन अपडेट और लोक सेवा गारंटी जैसे कदम उठाए गए हैं, मगर जमीनी स्तर पर अब भी ऐसे कई मामले सामने आते हैं जो सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं।
आगे की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस अब सुप्रिया जैन की संपत्ति और पिछले ट्रांजैक्शनों की जांच भी करने जा रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या इस प्रकार की मांगें पहले भी की गई थीं और क्या इससे जुड़े कोई अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो आगे और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
भोपाल की इस घटना ने एक बार फिर यह सिखाया है कि जागरूक नागरिक ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत हैं। सुप्रिया जैन की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि कानून के लंबे हाथ किसी को भी बख्शते नहीं हैं, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।