
खाम्हा गांव की जमीन से निकला 'खजाना': मजदूरों की लड़ाई ने खोला सदियों पुराना राज!
शहडोल (गोहपारू)। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के एक छोटे से गांव खाम्हा में उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक निर्माणाधीन मकान की खुदाई के दौरान सदियों पुराना रहस्य उजागर हुआ। जमीन के नीचे दबा वह रहस्य था सोने-चांदी से भरा एक हांडा—जिसे पहले तो छिपाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह रहस्य मजदूरों की आपसी लड़ाई के कारण सामने आ गया।
गांव के निवासी पूरन सिंह अपने मकान का निर्माण कार्य करवा रहे थे। तीन मजदूर खुदाई में लगे थे, तभी अचानक फावड़े की चोट किसी ठोस वस्तु से जा टकराई। पहले तो उन्होंने सोचा कि शायद कोई पत्थर हो, लेकिन मिट्टी हटाने पर एक लोहे का हांडा दिखाई दिया। जब उसे बाहर निकाला गया, तो मजदूरों की आंखें चौंधिया गईं—हांडा भरा था चमचमाते चांदी और सोने के सिक्कों से।
मजदूरों ने छिपाया खजाना, मालिक को नहीं दी जानकारी
सामान्यतः ऐसा कोई कीमती सामान मिलने पर पुलिस या प्रशासन को सूचना दी जाती है, लेकिन इस मामले में लालच भारी पड़ गया। मजदूरों ने मकान मालिक पूरन सिंह को बिना बताए ही आपस में सिक्कों का बंटवारा कर लिया। वे सोच रहे थे कि किसी को भनक नहीं लगेगी, लेकिन लालच का यही नतीजा होता है—राज छिपाए नहीं छिपता।
एक मजदूर को मिला कम हिस्सा, फिर शुरू हुआ विवाद
जब बंटवारे की बात आई तो तीनों मजदूरों के बीच विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि एक मजदूर को बाकी दो की तुलना में कम सिक्के मिले, जिससे वह नाराज हो गया और उसने गुपचुप तरीके से गांव में चर्चा शुरू कर दी कि "जमीन में कुछ कीमती चीज मिली थी।" गांव में बातें फैलने लगीं, और कुछ ही दिनों में यह बात मकान मालिक तक पहुंच गई।
मकान मालिक ने की शिकायत, पुलिस ने की कार्रवाई
पूरन सिंह को जैसे ही शक हुआ, उन्होंने तुरंत गोहपारू थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और मजदूरों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान जब दबाव बढ़ा, तो सच्चाई बाहर आ गई। पुलिस ने तीनों मजदूरों के ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुल 51 चांदी के सिक्के और 2 सोने के सिक्के बरामद किए।
सिक्कों का मध्यकालीन इतिहास, ASI को भेजी गई जानकारी
बरामद किए गए सिक्कों की बनावट, वजन और आकृति देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि ये मध्यकालीन युग के हैं। पुलिस ने इस बारे में पुरातत्व विभाग (ASI) को भी सूचना दे दी है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उस क्षेत्र में कोई और ऐतिहासिक वस्तु तो जमीन में दबी नहीं है।
गांव में चर्चा का विषय बना ‘गुप्त खजाना’
पूरा खाम्हा गांव अब इस खजाने की कहानी को लेकर उत्सुकता और उत्साह से भर गया है। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि यह खजाना किसी पुराने राजा या ज़मींदार का हो सकता है, जो किसी युद्ध या खतरे के दौरान यहां छिपा दिया गया होगा। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह कोई धार्मिक या तांत्रिक सामग्री हो सकती है, जिसे जमीन में गाड़ा गया था।
कानून क्या कहता है ऐसे मामलों में?
भारतीय पुरातत्व अधिनियम के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को खुदाई के दौरान कोई प्राचीन वस्तु या खजाना मिलता है, तो उसे तुरंत स्थानीय प्रशासन या पुरातत्व विभाग को सूचित करना होता है। ऐसा न करने पर यह कानूनी अपराध माना जाता है। इस मामले में भी मजदूरों के खिलाफ अवैध रूप से ऐतिहासिक धरोहर को छुपाने और आपसी बंटवारा करने का मामला दर्ज किया गया है।
अब क्या होगा खजाने का?
बरामद किए गए सोने-चांदी के सिक्कों को पुलिस ने जब्त कर लिया है और उन्हें आगे की जांच के लिए पुरातत्व विभाग को सौंपा जाएगा। अगर ये सिक्के ऐतिहासिक महत्व के पाए जाते हैं, तो इन्हें राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा सकता है।
इस रहस्यमय घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की मिट्टी अपने अंदर न जाने कितने रहस्य और कहानियाँ समेटे हुए है। और कभी-कभी, ये कहानियाँ एक मामूली लड़ाई से उजागर हो जाती हैं—जैसे खाम्हा गांव में हुआ।