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केंद्र का बड़ा फरमान: साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम, सभी मोबाइल कंपनियों को 3 महीने का अल्टीमेटम

2025-12-03  BHOPAL REPORTER VIJAY SHARMA  295 views

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नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। अब जल्द ही भारत में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन डिवाइस में सरकार का महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा एप्लिकेशन 'संचार साथी' (Sanchar Saathi App) पहले से ही इंस्टॉल (Pre-loaded) किया हुआ आएगा। दूरसंचार विभाग (DoT) ने देश की सभी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं और उन्हें यह नई व्यवस्था लागू करने के लिए तीन महीने का अल्टीमेटम दिया गया है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से देश में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud), फर्जी सिम कार्डों के इस्तेमाल और मोबाइल सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों को कम करने में एक बड़ी कामयाबी मिलेगी। यह आदेश लागू होने के बाद, चाहे वह कोई भी ब्रांड हो—सैमसंग, शाओमी, एप्पल, या कोई भारतीय कंपनी—भारत में लॉन्च होने वाले या बिकने वाले सभी नए डिवाइस में यह सुरक्षा कवच अब अनिवार्य रूप से मौजूद रहेगा।

क्यों जरूरी हुआ ‘संचार साथी’ का प्री-इंस्टॉलेशन?

पिछले कुछ वर्षों में, भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके साथ ही, फर्जी सिम कार्ड (Fake SIM) के जरिए होने वाली साइबर ठगी, खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन का दुरुपयोग और फिशिंग जैसे अपराध भी खतरनाक तरीके से बढ़े हैं। 'संचार साथी' ऐप को दूरसंचार विभाग ने इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए एक मजबूत हथियार के तौर पर विकसित किया है।

यह ऐप मुख्य रूप से तीन बड़े काम करता है:

 * खोए/चोरी हुए फोन की ट्रैकिंग: यह यूजर्स को अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक करने और ट्रैक करने में मदद करता है।

 * फर्जी कनेक्शन की पहचान: यह यूजर को यह जांचने की सुविधा देता है कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन (SIM) जारी किए गए हैं, जिससे फर्जी और अनधिकृत कनेक्शन को बंद किया जा सके।

 * धोखाधड़ी पर निगरानी: ऐप में ऐसे टूल्स हैं जो धोखाधड़ी वाले नंबरों और संदेशों की पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे नागरिकों की वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

सरकार का यह निर्णय इस बात पर जोर देता है कि डिजिटल सुरक्षा अब एक 'विकल्प' नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का 'अधिकार' होना चाहिए। जब यह ऐप हर फोन में पहले से इंस्टॉल होगा, तो यूजर्स को अलग से इसे डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे सुरक्षा उपायों को अपनाने की दर (Adoption Rate) में भारी वृद्धि होगी।

मोबाइल कंपनियों पर क्या होगा असर?

दूरसंचार विभाग ने मोबाइल निर्माताओं को 90 दिनों का समय दिया है ताकि वे अपनी सॉफ्टवेयर बिल्ड (Software Build) और सप्लाई चेन (Supply Chain) में आवश्यक बदलाव कर सकें। यह निर्देश भारत में काम कर रही सभी बहुराष्ट्रीय और घरेलू स्मार्टफोन कंपनियों के लिए बाध्यकारी है।

जानकारों का मानना है कि यह कदम एक तरह से 'सुरक्षा का डिफ़ॉल्ट' (Default Security) स्थापित करेगा। हालांकि, कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट और भारत में बिकने वाले मॉडलों के लिए विशेष रूप से यह ऐप जोड़ने की प्रक्रिया में कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और उपभोक्ता हित को देखते हुए, यह बदलाव अपरिहार्य माना जा रहा है।

तीन महीने के बाद, DoT सख्ती से यह जांच करेगा कि कंपनियों ने निर्देशों का पालन किया है या नहीं। यदि कोई कंपनी इसका उल्लंघन करती है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार अब केवल जागरूकता फैलाने पर ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सक्रिय रूप से सुरक्षित करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। 'संचार साथी' ऐप का प्री-इंस्टॉलेशन साइबर अपराध के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।


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