
वसीम कुरेशी रायसेन, मध्य प्रदेश: रायसेन जिले की कृषि उपज मंडी में सोमवार को किसानों का सैलाब उमड़ पड़ा। किसान जागृति संगठन के आह्वान पर बुलाई गई इस किसान पंचायत में जिलेभर से आए सैकड़ों किसानों ने अपनी समस्याओं पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान एकमत होकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जो सीधे तौर पर किसानों की सबसे बड़ी मांगों को उजागर करते हैं। इस पंचायत से यह साफ संदेश दिया गया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
फसल बीमा: किसानों की सबसे बड़ी मांग
पंचायत में सबसे ज्यादा जोर फसल बीमा योजना की खामियों पर दिया गया। किसानों ने कई ऐसी मांगें रखीं, जो सीधे तौर पर इस योजना को पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने से जुड़ी हैं:
* सभी किसानों को मिले लाभ: पंचायत में यह मांग रखी गई कि जिले के हर किसान को बिना किसी भेदभाव के फसल बीमा का लाभ दिया जाए। वर्तमान में कई किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
* खसरा स्तर पर बीमा: किसानों ने यह मांग रखी कि फसल बीमा की गणना खसरा स्तर पर की जाए, न कि ब्लॉक स्तर पर। इससे वास्तविक नुकसान का पता चलेगा और जरूरतमंद किसानों को सही मुआवजा मिल पाएगा। साथ ही, उन्होंने थ्रेसहोल्ड सिस्टम को खत्म करने की भी मांग की।
* निजी कंपनियों पर सवाल: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में निजी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें इस योजना से बाहर करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
* पारदर्शिता जरूरी: किसानों ने कहा कि फसल कटाई के प्रयोग उनकी मौजूदगी में हों और पंचनामे की एक कॉपी उन्हें भी दी जाए। इसके अलावा, हर सीजन में उन्हें फसल बीमा पॉलिसी दी जाए, ताकि उन्हें पूरी जानकारी हो।
समर्थन मूल्य और कर्जमाफी: आर्थिक सुरक्षा की मांग
फसल बीमा के साथ-साथ, किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे:
* मोटा देशी धान: किसानों ने मोटा देशी धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की।
* बासमती धान: रायसेन जिले के किसानों के लिए महत्वपूर्ण बासमती धान का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की गई।
* कर्जमाफी: पंचायत में सभी प्रकार के कृषि ऋणों को माफ करने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।
अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव
किसानों ने सिर्फ फसल और आर्थिक मुद्दों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अन्य समस्याओं पर भी ध्यान दिलाया:
* सिंचाई की मांग: रायसेन और विदिशा जिलों की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए मकोड़िया डेम के निर्माण की मांग की गई।
* राजस्व विभाग में सुधार: गांवों का सीमांकन करने और अक्स, खसरा व पंजी का सही मिलान करने की मांग रखी गई। साथ ही, तहसीलदार के न्यायिक अधिकारों को समाप्त कर उन्हें सिर्फ राजस्व विभाग तक सीमित रखने की मांग भी की गई।
* बिजली बिल पर रोक: सिंचाई पंपों की गलत क्षमता दर्ज कर की जा रही अतिरिक्त बिलिंग को रोकने की मांग भी उठाई गई।
* खाद की उपलब्धता: किसानों ने खरीफ और रबी फसलों के लिए डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
नेताओं की मौजूदगी, आंदोलन की चेतावनी
इस महत्वपूर्ण पंचायत में किसान जागृति संगठन के प्रमुख इरफान जाफरी, जिला अध्यक्ष रंजीत यादव, महासचिव रामस्वरूप राठौर, उपाध्यक्ष इशहक अली खान, और जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह लोधी सहित कई किसान नेता और सैकड़ों किसान शामिल हुए। उन्होंने एक स्वर में कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
यह किसान पंचायत साफ तौर पर दिखाती है कि रायसेन के किसान अब संगठित होकर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी इन मांगों पर सरकार का अगला कदम क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।