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किसानों को राहत: हेलीकॉप्टर और 'बोमा' तकनीक से पकड़े गए 295 कृष्णमृग, देश में पहली बार चला ऐसा अनूठा अभियान!

2025-10-26  BHOPAL REPORTER VIJAY SHARMA  537 views

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शाजापुर/देवास (मध्य प्रदेश): पश्चिमी मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर, खेतों को नुकसान पहुंचाने वाले कृष्ण मृगों (Blackbucks) और रोज़ड़ों (नीलगाय) को पकड़ने का एक ऐतिहासिक अभियान शाजापुर जिले में सफलतापूर्वक जारी है। यह देश में अपनी तरह का पहला ऐसा अभियान है, जिसमें आधुनिक तकनीक और वन्यजीव संरक्षण की अनूठी रणनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आज 147, अब तक 295 कृष्णमृगों का सफल रेस्क्यू

वन विभाग की टीम ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ टीम के सहयोग से हेलीकॉप्टर और विशेष 'बोमा' तकनीक का उपयोग कर यह अभियान चलाया है। वनमंडलाधिकारी देवास एवं अभियान प्रभारी श्री वीरेन्द्र सिंह पटेल ने बताया कि आज (शुक्रवार) शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील के लसूड़िया घाघ, निपनिया खुर्द, बदलपुर, पोचानेर, अरनियाकला और बेरछा दातार गाँव से रिकॉर्ड 147 कृष्णमृगों को किसानों के खेतों से पकड़ा गया।

इस बड़ी सफलता के साथ, अभियान शुरू होने के बाद से अब तक कुल 295 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़कर अन्य संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों के वन क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से छोड़ा जा चुका है।

किसानों को मिली बड़ी राहत

लंबे समय से कृष्णमृगों और रोज़ड़ों के झुंड किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे, जिससे कृषकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही थी। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान से निजात दिलाना और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित करना है। इस पहल से पश्चिमी मध्य प्रदेश के किसानों की वर्षों पुरानी समस्या का प्रभावी निदान हो रहा है।

'बोमा' तकनीक: वन्यजीवों के लिए सुरक्षित तरीका

इस अभियान में उपयोग की जा रही ‘बोमा’ तकनीक वन्यजीवों को बिना किसी नुकसान के पकड़ने की एक वैज्ञानिक और सुरक्षित पद्धति है। हेलीकॉप्टर की मदद से वन्यजीवों को खेतों से 'हाँका' लगाकर एक विशेष रूप से बनाए गए बाड़े (बोमा) में लाया जाता है, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित रूप से वन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक श्री शुभरंजन सेन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने बोमा क्षेत्र में उपस्थित रहकर पूरी कार्यवाही का बारीकी से निगरानी और पर्यवेक्षण किया। इसमें अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री एल कृष्णमूर्ति, मुख्य वन संरक्षक उज्जैन श्री एम आर बघेल और अन्य डीएफओ शामिल रहे।

प्रशासन और ग्रामीणों का सहयोग जरूरी

इस महत्वपूर्ण अभियान में शाजापुर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग का पूर्ण सहयोग रहा है। वन विभाग ने ग्रामवासियों से अपील की है कि आगामी दिनों की कार्यवाही के दौरान वे खेतों में हेलीकॉप्टर से 'हाँका' लगाए जाने के समय कृष्णमृगों के पीछे न भागें और अनावश्यक रूप से रास्तों पर वाहनों से न घूमें, ताकि अभियान सुचारू रूप से चल सके।

यह अभियान नवंबर माह के पहले सप्ताह तक शाजापुर जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जारी रहेगा, जिसमें कृष्णमृगों के साथ-साथ नीलगायों को भी पकड़कर अन्य वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। मध्य प्रदेश का यह पायलट प्रोजेक्ट देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम कर रहा है।


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