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इंदौर में हैवानियत: मात्र 3500 रुपये के पेट्रोल के लिए पंप कर्मचारी को कार से घसीटा

2026-03-12  Amit raikwar  157 views

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​इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के पास एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। इंदौर-उज्जैन हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर महज 3500 रुपये के लिए एक गरीब परिवार का चिराग बुझा दिया गया। रसूख के नशे में चूर कार सवारों ने एक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को कार से तब तक घसीटा, जब तक कि उसके प्राण नहीं निकल गए।

​तड़के सुबह की वो खौफनाक वारदात

​घटना सांवेर तहसील के कजलाना स्थित 'चारपाई ढाबा' पेट्रोल पंप की है। मालिखेड़ी गांव का रहने वाला रोहित परमार (पिता शंकरलाल) अपने परिवार का पेट पालने के लिए यहाँ नौकरी करता था। बुधवार तड़के जब दुनिया सो रही थी, रोहित अपनी ईमानदारी से ड्यूटी कर रहा था। तभी एक कार पेट्रोल भरवाने पहुंची।

​रोहित ने कार में 3500 रुपये का पेट्रोल डाला, लेकिन उसे क्या पता था कि यही उसकी जिंदगी की आखिरी सर्विस साबित होगी। पेट्रोल डलवाने के बाद कार सवारों ने पैसे देने के बजाय रफ्तार बढ़ा दी।

​पैसे मांगे तो मिली मौत, दूर तक घसीटते ले गए बेरहम

​अपना हक मांगने के लिए रोहित ने हिम्मत दिखाई और भागती कार के पीछे दौड़ा। चश्मदीदों के मुताबिक, रोहित ने कार को रोकने के लिए खिड़की में हाथ डाला, लेकिन कार सवारों का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने रफ्तार और बढ़ा दी। रोहित सड़क पर काफी दूर तक घसीटता रहा। पत्थरों और डामर की रगड़ से उसका शरीर छलनी हो गया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। 3500 रुपये का लालच उन रसूखदारों पर इतना हावी था कि उन्हें एक इंसान की जान की कोई कीमत नजर नहीं आई।

​क्या है 'करणी सेना' की प्लेट का सच?

​घटनास्थल पर मौजूद लोगों और प्राथमिक जानकारी के अनुसार, जिस कार से यह जघन्य वारदात हुई, उस पर 'करणी सेना' की प्लेट लगी हुई थी। हालांकि, पुलिस अभी गाड़ी के नंबर और उसमें सवार लोगों की शिनाख्त करने में जुटी है। सवाल यह उठता है कि किसी संगठन का नाम लिखकर घूमने वाले लोग इतने निर्दयी कैसे हो सकते हैं?

​पेट्रोल पंप प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर

​इस दर्दनाक मौत ने पेट्रोल पंप संचालकों की सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोल दी है।

  • ​न गार्ड, न कैमरे: जिस पंप पर यह हादसा हुआ, वहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था और न ही पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगे थे।
  • ​असुरक्षित कर्मचारी: हाईवे पर स्थित होने के बावजूद यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। अगर कैमरे सही होते, तो हत्यारों का चेहरा और गाड़ी का नंबर अब तक पुलिस की गिरफ्त में होता।

​उजड़ गया गरीब का आशियाना

​रोहित सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि अपने घर का आधार था। वह रात-रात भर जागकर इसलिए काम करता था ताकि अपने माता-पिता और परिवार को दो वक्त की रोटी दे सके। चंद रुपयों के लिए की गई इस क्रूरता ने एक बूढ़े पिता से उसका सहारा छीन लिया है।

​सांवेर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। हाईवे पर लगे अन्य सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारा समाज इतना गिर चुका है कि 3500 रुपये की कीमत एक इंसान की जान से ज्यादा हो गई है?


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